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बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा के दलबदल का मामला गरमाया

बिहार विधान परिषद चुनाव में भाजपा के दलबदल का मामला तूल पकड़ रहा है। निर्दलीय एमएलसी वंशीधर ब्रजवासी और राहुल राज ने भाजपा में शामिल होने का दावा किया है, लेकिन दलबदल कानून के चलते उनकी सदस्यता पर संकट मंडरा रहा है। क्या भाजपा और जदयू इस मुद्दे पर बातचीत करेंगे? जानें इस राजनीतिक उठापटक के पीछे की पूरी कहानी।
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भाजपा पर आरोप और दलबदल का संकट


बिहार में भाजपा की सहयोगी पार्टी जनता दल यू ने विधान परिषद चुनाव में भाजपा पर भितरघात का आरोप लगाया था, और अब यह आरोप सच साबित होते दिख रहे हैं। तिरहुत स्नातक सीट से निर्दलीय जीतने वाले वंशीधर ब्रजवासी भाजपा में शामिल हो गए हैं। इसी तरह, सारण शिक्षक सीट से निर्दलीय राहुल राज ने भी भाजपा का दामन थाम लिया है। मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने 31 अक्टूबर को इन दोनों को भाजपा में शामिल कराया।


तिरहुत स्नातक सीट पर वंशीधर ब्रजवासी ने जदयू के अभिषेक झा को 9,147 वोट से हराया, जबकि सारण शिक्षक सीट पर राहुल राज ने जदयू के पुष्कर आनंद को 1,815 वोट से पराजित किया।


हालांकि, दलबदल कानून के अनुसार, यदि कोई निर्दलीय एमएलसी किसी पार्टी में शामिल होता है, तो उसकी सदस्यता समाप्त हो जाती है। जैसे ही इस कानून का जिक्र हुआ, दोनों ने यह कहना शुरू कर दिया कि वे भाजपा में शामिल नहीं हुए, बल्कि एनडीए में शामिल हुए हैं और बाहर से समर्थन देने का वादा किया है। लेकिन उनकी सदस्यता की परची भी मीडिया में वायरल हो रही है।


इन दोनों के लिए एक और समस्या यह है कि बिहार विधान परिषद के सभापति अभी जदयू के रामवचन राय हैं। भाजपा के अवधेश नारायण सिंह की जगह रामवचन राय को सभापति बनाया गया है। यदि वे अपनी पार्टी के साथ भितरघात का बदला लेना चाहें, तो वे एक झटके में दोनों को अयोग्य ठहरा सकते हैं। हालांकि, यदि भाजपा और जदयू के बीच बातचीत होती है, तो सभापति मामले को कई वर्षों तक लंबित रख सकते हैं।