ब्रिक्स शिखर सम्मेलन 2026: भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत और आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन का समापन
नई दिल्ली: 12 सितंबर 2026 को भारत में आयोजित 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के समापन सत्र में 'नई दिल्ली घोषणापत्र 2026' को सभी सदस्य देशों ने सहमति से मंजूरी दी। इस घोषणापत्र पर किसी भी देश द्वारा आपत्ति न उठाना भारत की अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है। इस दस्तावेज के माध्यम से ब्रिक्स देशों ने यह स्पष्ट किया है कि वैश्विक विवादों का समाधान केवल संवाद और कूटनीति के माध्यम से ही संभव है। इसके साथ ही, अमेरिकी टैरिफ की धमकियों पर चिंता व्यक्त करते हुए वैश्विक व्यापार, निर्बाध सप्लाई चेन और ऊर्जा सुरक्षा के लिए एकजुटता का संकल्प लिया गया।
आतंकवाद के खिलाफ जीरो टॉलरेंस
पहलगाम आतंकी हमले की निंदा
घोषणापत्र के 40वें बिंदु में भारत के दृष्टिकोण को मजबूती से प्रस्तुत करते हुए आतंकवाद के प्रति 'जीरो टॉलरेंस' की नीति को दोहराया गया। इसमें 22 अप्रैल 2025 को जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले की कड़ी निंदा की गई, जिसमें 26 निर्दोष लोगों की जान गई थी। ब्रिक्स ने यह स्पष्ट किया कि आतंकवाद का कोई भी रूप पूरी तरह से आपराधिक है और इसे किसी भी परिस्थिति में स्वीकार नहीं किया जा सकता।
भारत की कूटनीतिक सफलता
प्रधानमंत्री मोदी का संबोधन
सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने वैश्विक व्यवस्था में आवश्यक बदलाव की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि ग्लोबल साउथ के देश वैश्विक संकटों का सबसे पहले सामना करते हैं, लेकिन निर्णय लेने की प्रक्रिया में उन्हें पीछे धकेल दिया जाता है। पीएम मोदी ने इस 'विशेषाधिकार के पिरामिड' को समाप्त करने और समान साझेदारी के लिए एक मंच बनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने वैश्विक शासन सुधारों के लिए 10 सूत्रीय प्रस्ताव का सुझाव दिया, जिसे अगले सम्मेलन तक एक ठोस ब्रिक्स सुधार रोडमैप में परिवर्तित किया जा सके।
वैश्विक नेताओं की उपस्थिति में महत्वपूर्ण घोषणापत्र
दुनिया को सख्त संदेश
प्रधानमंत्री मोदी ने यह स्पष्ट किया कि ब्रिक्स समूह किसी देश या संगठन के खिलाफ नहीं है, बल्कि यह एक नियम-आधारित और समावेशी वैश्विक व्यवस्था का समर्थन करता है। इस ऐतिहासिक सम्मेलन में रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन, चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग, ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेजेश्कियान, दक्षिण अफ्रीका के राष्ट्रपति सिरिल रामाफोसा और यूएई के क्राउन प्रिंस मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान जैसे कई प्रमुख वैश्विक नेता उपस्थित थे। इन नेताओं की उपस्थिति में पारित यह घोषणापत्र भविष्य की वैश्विक राजनीति के लिए महत्वपूर्ण साबित होगा।
