ब्रिक्स शिखर सम्मेलन: नई दिल्ली घोषणापत्र पर सहमति, मोदी की कूटनीतिक जीत
नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की सफलता
नई दिल्ली: हाल ही में भारत में आयोजित ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान नई दिल्ली घोषणापत्र पर सभी सदस्य देशों की सहमति को एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक उपलब्धि माना जा रहा है। यह उल्लेखनीय है कि इससे पहले ब्रिक्स विदेश मंत्रियों की बैठक में कोई साझा बयान जारी नहीं किया जा सका था। ऐसे में, भारत की अध्यक्षता में घोषणापत्र पर सहमति बनना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए एक बड़ी सफलता के रूप में देखा जा रहा है। विदेशी मीडिया ने भी इस सम्मेलन और भारत की भूमिका को प्रमुखता से कवर किया है।
पश्चिम एशिया के लिए संतुलित दृष्टिकोण
नई दिल्ली घोषणापत्र में पश्चिम एशिया के संघर्षों के संदर्भ में संतुलित भाषा का प्रयोग किया गया है। इसमें संयुक्त राष्ट्र चार्टर के सिद्धांतों के अनुसार नागरिकों और आवश्यक नागरिक ढांचे की सुरक्षा पर जोर दिया गया है। इसके साथ ही, देशों की संप्रभुता और क्षेत्रीय अखंडता का सम्मान करने की बात की गई है, और विवादों के समाधान के लिए बातचीत और कूटनीति का रास्ता अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया गया है।
विदेशी मीडिया की प्रतिक्रियाएँ
द वॉशिंगटन पोस्ट ने भारत-चीन संबंधों में सुधार की कोशिशों को उजागर किया है। रिपोर्ट में प्रधानमंत्री मोदी और चीनी राष्ट्रपति शी जिनपिंग की मुलाकात को दोनों देशों के रिश्तों में प्रगति के संकेत के रूप में देखा गया है। ग्लोबल टाइम्स ने ब्रिक्स को वैश्विक दक्षिण की बढ़ती ताकत के रूप में प्रस्तुत किया और मौजूदा वैश्विक परिस्थितियों में संगठन की भूमिका पर जोर दिया।
अल जजीरा ने अमेरिकी टैरिफ और व्यापारिक प्रतिबंधों के बीच हुए सम्मेलन को महत्वपूर्ण बताया। रिपोर्ट में अमेरिकी नीतियों को ब्रिक्स के विस्तार और एकजुटता के लिए सहायक कारक के रूप में देखा गया। वहीं, द न्यूयॉर्क टाइम्स ने ईरान की उपस्थिति और भारत, चीन व रूस के नेताओं के साथ उसके एक मंच पर आने को प्रमुखता दी।
व्यापार और AI में सहयोग
घोषणापत्र में सदस्य देशों के बीच स्थानीय मुद्राओं में द्विपक्षीय व्यापार को बढ़ावा देने, स्वास्थ्य क्षेत्र में सहयोग को मजबूत करने और संगठित साइबर ठगी के खिलाफ मिलकर कार्रवाई करने पर जोर दिया गया है। इसके अलावा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से जुड़े जोखिमों को कम करने की आवश्यकता भी बताई गई है। कुल मिलाकर, नई दिल्ली घोषणापत्र को भारत की कूटनीतिक सक्रियता और ब्रिक्स में उसकी नेतृत्वकारी भूमिका के संदर्भ में महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
