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भाजपा और अकाली दल के बीच चुनावी तालमेल की चर्चा

भारतीय जनता पार्टी ने पंजाब में अकाली दल के साथ चुनावी गठबंधन करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय कई दौर की बातचीत के बाद लिया गया है, जिसमें भाजपा सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि भाजपा किसी भी प्रकार का तालमेल नहीं करेगी। इस बीच, अकाली दल पहले से तय फॉर्मूले के अनुसार चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है। जानिए इस राजनीतिक समीकरण का क्या असर होगा पंजाब के चुनावों पर।
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भाजपा और अकाली दल का गठबंधन


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने पंजाब में अकाली दल के साथ चुनावी गठबंधन करने का निर्णय लिया है। यह निर्णय कई दौर की बातचीत के बाद लिया गया, जिसमें अकाली दल के नेता सुखबीर बादल ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मुलाकात की। इस मुलाकात के बाद, भाजपा ने परिसीमन के मुद्दे पर सरकार का समर्थन करने का आश्वासन दिया है। हालांकि, अकाली दल के पास केवल एक लोकसभा सीट है, लेकिन भाजपा इस समय हर सीट की तलाश में है।


भाजपा के बड़े नेता यह स्पष्ट कर रहे हैं कि वे सभी सीटों पर अकेले चुनाव लड़ने की तैयारी कर रहे हैं। हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा है कि भाजपा किसी भी प्रकार का तालमेल नहीं करेगी और अकेले चुनाव लड़ेगी। यह दबाव इसलिए बनाया जा रहा है ताकि अकाली दल से अधिक सीटें प्राप्त की जा सकें। दूसरी ओर, अकाली दल पहले से तय फॉर्मूले के अनुसार चुनाव लड़ने की इच्छा रखता है।


पंजाब में पहले से तय फॉर्मूला यह है कि भाजपा 23 सीटों पर चुनाव लड़ेगी। राज्य की 117 विधानसभा सीटों में से 90 से अधिक सीटों पर अकाली दल हमेशा से चुनाव लड़ता आया है। इस बार भी अकाली दल इसी फॉर्मूले पर चलना चाहता है। लेकिन भाजपा का कहना है कि आम आदमी पार्टी के उदय और प्रकाश सिंह बादल के निधन के कारण बादल परिवार की राजनीतिक स्थिति कमजोर हुई है।


भाजपा के जानकार नेताओं का मानना है कि सीटों की संख्या 23 या 25 पर नहीं रुकेगी। भाजपा कम से कम 50 सीटों पर मोलभाव शुरू करेगी और 30 से 40 सीटों के बीच मामला तय होगा। यदि ऐसा होता है, तो भाजपा इसे अपनी जीत मान लेगी। भाजपा शहरी और हिंदू बहुल सीटों पर ध्यान केंद्रित कर रही है। अकाली दल को भी इस स्थिति में कोई समस्या नहीं होगी, क्योंकि उसे पता है कि भाजपा के साथ जाने से कुछ हिंदू वोट मिल सकते हैं।


हालांकि, यह कहना मुश्किल है कि अकाली दल के साथ आने से भाजपा को जाट सिख वोट मिलेंगे, क्योंकि राज्य के किसान भाजपा से नाराज हैं। इस दबाव की राजनीति के तहत, पंजाब भाजपा के अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने दिल्ली में प्रधानमंत्री से मुलाकात की और कहा कि पार्टी अकेले चुनाव की तैयारी कर रही है। नायब सिंह सैनी ने भी कहा कि भाजपा किसी तालमेल के बिना चुनाव लड़ेगी। यह सीटें बढ़ाने की योजना का हिस्सा है।