भाजपा का मानसून सत्र में बहुमत जुटाने का प्रयास, छोटी पार्टियों पर नजर
संसद में बहुमत की रणनीति
भारतीय जनता पार्टी केवल बड़ी राजनीतिक पार्टियों को तोड़ने की कोशिश नहीं कर रही है, बल्कि वह कई छोटी पार्टियों पर भी ध्यान केंद्रित कर रही है। सूत्रों के अनुसार, झारखंड मुक्ति मोर्चा, जम्मू कश्मीर की नेशनल कॉन्फ्रेंस, और दिल्ली व पंजाब की आम आदमी पार्टी के सांसदों से भी बातचीत चल रही है। यदि इन पार्टियों के नेता संसद के मानसून सत्र में संविधान संशोधन से संबंधित विधेयकों का समर्थन नहीं करते हैं, तो उनकी पार्टियों में भी टूटने की संभावना है। उल्लेखनीय है कि आम आदमी पार्टी के सात राज्यसभा सांसद पहले ही टूट चुके हैं।
छोटी पार्टियों के सांसदों की स्थिति
झारखंड मुक्ति मोर्चा के तीन, आम आदमी पार्टी के तीन और नेशनल कॉन्फ्रेंस के दो लोकसभा सांसद भाजपा की नजर में हैं। यदि इन सांसदों के नेता सहमत हो जाते हैं, तो उन्हें वोटिंग के समय सदन से अनुपस्थित रहने के लिए कहा जा सकता है। हालांकि, जेएमएम और नेशनल कॉन्फ्रेंस के सांसदों के टूटने की संभावना कम है। नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेताओं को यह समझ है कि वे भाजपा की टिकट पर श्रीनगर और अनंतनाग की सीटें नहीं जीत सकते। इसी तरह, जेएमएम के आदिवासी सांसद भी भाजपा की टिकट पर जीतने की कठिनाई को समझते हैं। इसलिए, वे भाजपा से अपने नेताओं को तैयार करने की उम्मीद कर रहे हैं।
