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भाजपा की 2029 चुनाव की तैयारी: दो तिहाई बहुमत की रणनीति

भाजपा ने 2029 के लोकसभा चुनाव के लिए अपनी रणनीति को तेज कर दिया है। पार्टी अब दो तिहाई बहुमत हासिल करने की कोशिश कर रही है, जो कि पिछले चुनावों में मिली चुनौतियों के बाद आवश्यक हो गया है। जानें कैसे भाजपा विभिन्न राज्यों में परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दों का उपयोग कर अपनी स्थिति मजबूत करने की योजना बना रही है। क्या भाजपा अपनी योजना में सफल होगी? इस महत्वपूर्ण विषय पर पूरी जानकारी के लिए पढ़ें।
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भाजपा की 2029 चुनाव की तैयारी: दो तिहाई बहुमत की रणनीति

भाजपा की नई रणनीति

लोकसभा में भाजपा के नेतृत्व वाले एनडीए के पास साधारण बहुमत है, लेकिन अब इसे दो तिहाई बहुमत में बदलने की कोशिशें तेज हो गई हैं। जून 2024 में होने वाले लोकसभा चुनावों में भाजपा को अकेले बहुमत हासिल करने में कठिनाई का सामना करना पड़ा था, जिसके बाद उसे सहयोगी दलों का सहारा लेना पड़ा। अब भाजपा ने अचानक अपनी रणनीति में बदलाव किया है, जो संकेत देता है कि वह पश्चिम बंगाल में विधानसभा चुनाव जीतने के बाद अपनी योजना को लागू करने के लिए तैयार है।


भाजपा का लक्ष्य 2029 के लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करना है। इसके लिए वह संसद के दोनों सदनों में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने की कोशिश कर रही है। भाजपा के शीर्ष नेताओं को यह समझ में आ गया है कि 2029 का चुनाव 2024 से अधिक चुनौतीपूर्ण हो सकता है। परिसीमन और महिला आरक्षण जैसे मुद्दे इस प्रक्रिया में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।


भाजपा की योजना में पहले संविधान संशोधन और सीटों की संख्या बढ़ाने के लिए संसद में दो तिहाई बहुमत की आवश्यकता होगी। इसके लिए भाजपा को राज्यों में अपनी सरकारें बनाए रखने की जरूरत है। जम्मू-कश्मीर में राष्ट्रपति शासन के दौरान परिसीमन हुआ था, जिससे भाजपा को सीटें मिलीं। असम में भी भाजपा ने अपने शासन में परिसीमन किया, जिससे मुस्लिम मतदाताओं के प्रभाव वाले क्षेत्रों की संख्या कम हो गई।


भाजपा की नजर उन राज्यों पर है जहां उसने पिछली बार अच्छा प्रदर्शन नहीं किया था, जैसे उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र और पश्चिम बंगाल। इन राज्यों में कुल 170 लोकसभा सीटें हैं, जिनमें से भाजपा को केवल 65 सीटें मिली थीं। इसके अलावा, बिहार, झारखंड, हरियाणा और राजस्थान जैसे राज्यों में भी भाजपा को अतिरिक्त सीटें मिलने की संभावना है।


अब संसद में संशोधन बिल पास कराने के लिए आवश्यक संख्या जुटाने की कोशिशें चल रही हैं। इसके लिए भाजपा को अनैतिक तरीकों का सहारा लेना पड़ रहा है। लोकसभा में 360 और राज्यसभा में 163 सांसदों की आवश्यकता है। एनडीए के पास वर्तमान में 293 सांसद हैं, जिससे उसे 67 अतिरिक्त सांसदों की आवश्यकता है।


भाजपा के पास डीएमके का समर्थन भी हो सकता है, जो कि कांग्रेस के साथ अपने संबंधों में तनाव के कारण सरकार का समर्थन कर सकती है। इससे एनडीए को राज्यसभा में दो तिहाई बहुमत प्राप्त करने में मदद मिल सकती है। इस बार का मानसून सत्र बहुत महत्वपूर्ण होने वाला है, क्योंकि सरकार उसी विधेयक को पास कराने का प्रयास करेगी जिसे विपक्ष ने पहले विफल कर दिया था।