भाजपा की नई केंद्रीय टीम का गठन जल्द, नितिन नवीन की योजना
नितिन नवीन की अध्यक्षता में बदलाव की तैयारी
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन ने अपनी जिम्मेदारी संभाले हुए लगभग सात महीने पूरे कर लिए हैं, लेकिन उनकी नई केंद्रीय टीम की घोषणा का इंतजार अब भी जारी है। यह संभावना जताई जा रही है कि इस सप्ताह उनकी टीम का गठन किया जा सकता है।
गृह मंत्री की महत्वपूर्ण बैठकें
गृह मंत्री अमित शाह ने मानसून सत्र के दौरान कई प्रमुख नेताओं से मुलाकात की, जिनमें कैलाश विजयवर्गीय, नवनीत राणा, रेखा शर्मा और उज्ज्वल निकम शामिल थे। इन बैठकों को नई केंद्रीय टीम के गठन की प्रक्रिया से जोड़ा जा रहा है।
टीम में 38 पदाधिकारियों की संभावना
नितिन नवीन की केंद्रीय टीम में अधिकतम 38 पदाधिकारियों को शामिल किया जा सकता है। प्रस्तावित संरचना में 13 राष्ट्रीय उपाध्यक्ष, 8 राष्ट्रीय महामंत्री, एक संगठन महामंत्री, 15 राष्ट्रीय मंत्री और एक राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष शामिल होंगे। इसके साथ ही पार्टी के विभिन्न मोर्चों के राष्ट्रीय अध्यक्षों की भी घोषणा की जानी है। बीजेपी के संगठनात्मक नियमों के अनुसार, महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान है, इसलिए 38 पदाधिकारियों में कम से कम 13 महिलाओं को शामिल करना आवश्यक होगा।
चुनावी राज्यों पर ध्यान केंद्रित
नई टीम का गठन आगामी विधानसभा चुनावों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है। पार्टी ने लगभग हर राज्य से दो-दो संभावित नेताओं के नामों पर विचार किया है, जिनमें से चयनित नेताओं को केंद्रीय संगठन में जिम्मेदारी दी जा सकती है। अगले वर्ष उत्तर प्रदेश, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर, हिमाचल प्रदेश और गुजरात में चुनाव होने हैं, इसलिए इन राज्यों के नेताओं को प्राथमिकता मिलने की संभावना है। नितिन नवीन ने पिछले सात महीनों में कई राज्यों का दौरा कर कार्यकर्ताओं और नेताओं से संवाद किया है।
युवाओं को जिम्मेदारी देने की योजना
नितिन नवीन की टीम में युवा नेताओं को महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां मिलने की संभावना है। युवाओं की बदलती राजनीतिक सोच और उनकी बढ़ती भागीदारी को देखते हुए बीजेपी संगठन में नई पीढ़ी के चेहरों को आगे लाने की योजना बना रही है। हाल के वर्षों में युवाओं से जुड़े आंदोलनों और मुद्दों ने राजनीति को प्रभावित किया है। इसलिए पार्टी ऐसे नेताओं को शामिल करना चाहती है, जो युवा मतदाताओं की सोच और प्राथमिकताओं को बेहतर तरीके से समझ सकें। साथ ही, संगठन में अनुभव की कमी न हो, इसके लिए वरिष्ठ नेताओं को भी महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां दिए जाने की संभावना है।
