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भाजपा की नई टीम: नितिन नबीन के नेतृत्व में संगठन में बदलाव

भाजपा ने नितिन नबीन के नेतृत्व में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति की है, जो पिछले 209 दिनों की चर्चा का परिणाम है। इस नई टीम में कई पुराने चेहरे शामिल हैं, जबकि कुछ नए 'जमीनी नेता' भी हैं। हालांकि, महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है, लेकिन उनकी हिस्सेदारी सीमित है। जानें इस नई टीम के गठन के पीछे की रणनीति और हटाए गए पदाधिकारियों की चर्चा।
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भाजपा में नए पदाधिकारियों की नियुक्ति


नितिन नबीन के राष्ट्रीय अध्यक्ष बनने के बाद भाजपा ने 209 दिनों की गहन चर्चा के बाद नए पदाधिकारियों का चयन किया है। यह चयन देखकर कोई भी आश्चर्यचकित नहीं होगा। यदि भाजपा में ऐसे पदाधिकारी नहीं चुने जाते, तो यह निश्चित रूप से चौंकाने वाला होता। ध्यान देने वाली बात यह है कि जब कोई पार्टी सत्ता में होती है, तो उसके राष्ट्रीय अध्यक्ष या संगठन का महत्व कम हो जाता है। फिर भी, भाजपा को एक संगठित पार्टी माना जाता है, इसलिए एक प्रक्रिया का पालन किया जाता है।


पिछले एक दशक से भाजपा में यह मान्यता बन गई है कि यदि कोई नेता अपनी काबिलियत से बड़ा बनता है, तो उसे हाशिए पर डाल दिया जाता है। कुछ अपवाद हो सकते हैं, लेकिन यह सिद्धांत सरकार और संगठन दोनों में लागू होता है। अनजान चेहरों को आगे लाया जाता है, जो बाद में राजनीति के रंगमंच से गायब हो जाते हैं।


इस बार भी ऐसे कई 'जमीनी नेता' पार्टी में शामिल किए गए हैं, जिनकी कोई खास भूमिका नहीं होगी। कुछ पुराने कार्यकर्ता और कुछ नए चेहरे चुनावी कामकाज में लगाए जाएंगे।


भाजपा ने नई टीम में क्षेत्रीय संतुलन बनाने का प्रयास किया है, लेकिन चुनावी राज्यों की ओर झुकाव स्पष्ट है। चार चुनावी राज्यों से 18 पदाधिकारी बनाए गए हैं। महिलाओं को प्रतिनिधित्व देने का प्रयास किया गया है, लेकिन उनकी हिस्सेदारी केवल 18 प्रतिशत तक सीमित रह गई है।


नितिन नबीन की नई टीम में शामिल चेहरों की चर्चा के साथ-साथ हटाए गए पदाधिकारियों की भी चर्चा हो रही है। कई पुराने नेता पुनर्वास की उम्मीद में हैं, जबकि मंत्रिमंडल विस्तार की चर्चा भी चल रही है।