भाजपा की बांकीपुर हार से उत्तर प्रदेश में बढ़ी चिंता
बिहार की राजनीति और उत्तर प्रदेश की स्थिति
भाजपा की बांकीपुर सीट पर हार ने बिहार की राजनीति पर प्रभाव डाला है, लेकिन इसका उत्तर प्रदेश में भाजपा के लिए गंभीर परिणाम हो सकते हैं। बिहार में सवर्ण आबादी केवल 10.5 प्रतिशत है, जबकि उत्तर प्रदेश में यह लगभग 20 प्रतिशत है। अगड़ी जातियों का दावा है कि वे 25 प्रतिशत वोट का प्रतिनिधित्व करती हैं, लेकिन वास्तविकता में यह संख्या करीब 20 प्रतिशत है, जिसमें ब्राह्मणों की संख्या अधिक है।
उत्तर प्रदेश में वैश्य वर्ग अगड़ी जाति में शामिल होते हैं, जबकि बिहार में उन्हें पिछड़ी जातियों में रखा गया है। भाजपा को यह चिंता है कि हिंदुत्व की लहर अब पहले जैसी नहीं रही। योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में उत्तर प्रदेश में हिंदुत्व का मुद्दा मजबूत है, फिर भी अगड़ी जातियों में असंतोष बढ़ रहा है।
यूजीसी के दिशा-निर्देशों के कारण अगड़ी जातियों में नाराजगी है, साथ ही श्रीराम जन्मभूमि मंदिर में चढ़ावे की चोरी के आरोपों ने भी स्थिति को और बिगाड़ दिया है। भाजपा समर्थक सोशल मीडिया पर निगेटिव कैम्पेन चला रहे हैं, जिससे आरक्षण विरोध की भावना भी बढ़ रही है।
भाजपा को डर है कि सवर्णों की नाराजगी के साथ-साथ पिछड़ी जातियों में भी असंतोष बढ़ सकता है, जिसका लाभ समाजवादी पार्टी उठा सकती है। सपा गैर यादव पिछड़ी जातियों और गैर जाटव दलितों को आकर्षित करने के लिए पहले से ही प्रयास कर रही है।
हाल ही में, उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और पार्टी अध्यक्ष नितिन नबीन से मुलाकात की, जिसमें चुनावी स्थिति पर चर्चा की गई। भाजपा के नेता इस बात से संतुष्ट हैं कि प्रशांत किशोर ब्राह्मण हैं, इसलिए उन्हें बांकीपुर में सवर्ण वोट मिले। लेकिन उन्हें लगता है कि यूपी में अखिलेश यादव को सवर्ण वोट नहीं मिलेंगे।
