भाजपा की रणनीतियों का उलटा असर, कांग्रेस के खिलाफ प्रदर्शन में छात्रों की भागीदारी
भाजपा की रणनीतियों पर सवाल
भाजपा और उसकी सरकार की हालिया रणनीतियाँ अक्सर उलटी पड़ती नजर आ रही हैं। चाहे सोनम वांगचुक को जंतर मंतर से हटाने की योजना हो या छात्रों पर लाठीचार्ज का निर्णय, दोनों ही मामलों में विपरीत परिणाम देखने को मिले हैं। इसी तरह, राहुल गांधी के प्रधानमंत्री आवास के बाहर प्रदर्शन के खिलाफ भाजपा की प्रतिक्रिया भी नकारात्मक साबित हो रही है। यह संदेश फैल रहा है कि भाजपा को अपने खिलाफ प्रदर्शन सहन नहीं है, चाहे मुद्दा कितना भी महत्वपूर्ण क्यों न हो।
पटना में इस स्थिति की गूंज सबसे अधिक सुनाई दी। राहुल गांधी के प्रदर्शन के खिलाफ भाजपा ने बिहार में कांग्रेस मुख्यालय पर प्रदर्शन करने का निर्णय लिया। सैकड़ों भाजपा कार्यकर्ता वहां पहुंचे, लेकिन कांग्रेस के कार्यकर्ता भी तैयार थे, जिससे दोनों पक्षों के बीच भिड़ंत हो गई। इस दौरान, पटना में छात्रों ने भी अलग से प्रदर्शन किया, जो कई घंटों तक चला। छात्रों का यह प्रदर्शन भाजपा के खिलाफ भी समझा जा रहा था।
यह ध्यान देने योग्य है कि पटना की बांकीपुर सीट पर उपचुनाव हो रहा है, जहां नितिन नवीन की सीट है और प्रशांत किशोर चुनावी मैदान में हैं। भाजपा ने उत्तर प्रदेश में भी कांग्रेस कार्यालय के बाहर प्रदर्शन किया, लेकिन वहां भी इसका सकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ा।
