भाजपा में नए क्षत्रपों का उदय: प्रदेश राजनीति में बदलाव
भाजपा के प्रादेशिक क्षत्रपों का नया दौर
भाजपा में अटल बिहारी वाजपेयी और लालकृष्ण आडवाणी के समय कई प्रादेशिक क्षत्रप सक्रिय थे। ये नेता अपने केंद्रीय नेतृत्व का सम्मान करते थे, लेकिन अपनी राजनीतिक ताकत पर भरोसा रखते थे। कर्नाटक में बीएस येदियुरप्पा एकमात्र ऐसे नेता हैं, जिन्होंने अपनी ताकत को बनाए रखा है। वर्तमान में भाजपा का केंद्रीय नेतृत्व येदियुरप्पा को नजरअंदाज नहीं कर सकता। अन्य क्षत्रपों का प्रभाव अब समाप्त हो चुका है। मध्य प्रदेश में शिवराज सिंह चौहान, छत्तीसगढ़ में रमन सिंह, और राजस्थान में वसुंधरा राजे अब अपनी प्रदेश की राजनीति में प्रभावी नहीं हैं।
नरेंद्र मोदी, जो वाजपेयी और आडवाणी के समय के बड़े क्षत्रपों में से एक थे, 12 साल पहले प्रधानमंत्री बने। इसके बाद से प्रादेशिक क्षत्रपों की ताकत में कमी आई है। हालाँकि, अब भाजपा में नए क्षत्रप उभर रहे हैं। पिछले 12 वर्षों में कई नेताओं ने प्रदेश में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है और अपनी राजनीतिक पकड़ बनाई है।
उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, महाराष्ट्र के देवेंद्र फड़नवीस, और असम के हिमंत बिस्वा सरमा जैसे नेता अब भाजपा में मजबूत स्थिति में हैं। ये सभी नए मुख्यमंत्री हैं जो प्रदेश की राजनीति में अपने तरीके से फैसले ले रहे हैं।
मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव का नाम इस संदर्भ में विशेष रूप से उल्लेखनीय है। सूत्रों के अनुसार, वे पिछले ढाई साल में इतने मजबूत हो गए हैं कि प्रदेश के अन्य बड़े नेता चिंतित हैं। भाजपा के शीर्ष नेतृत्व ने उन्हें मुख्यमंत्री बनाते समय कई बड़े नेताओं को किनारे कर दिया था। यदि मोहन यादव उपचुनाव में जीत हासिल करते हैं, तो उनका कद और बढ़ेगा।
बिहार में सम्राट चौधरी भी एक महत्वपूर्ण नेता हैं, जो बांकीपुर उपचुनाव में प्रशांत किशोर को हराने की स्थिति में हैं। पश्चिम बंगाल में शुभेंदु अधिकारी ने भाजपा को लोकसभा और राज्यसभा में सांसद दिए हैं। इस प्रकार, योगी, फड़नवीस, हिमंता, सम्राट चौधरी, शुभेंदु अधिकारी, पुष्कर सिंह धामी, और मोहन यादव जैसे नेता अब भाजपा में प्रादेशिक क्षत्रप के रूप में उभर रहे हैं।
