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भाजपा संसदीय बोर्ड में बदलाव की संभावना, नए चेहरे हो सकते हैं शामिल

भारतीय जनता पार्टी के संसदीय बोर्ड में संभावित बदलाव की चर्चा चल रही है। पार्टी की राष्ट्रीय टीम के गठन और सरकार में फेरबदल की अटकलों के बीच, पिछले कार्यकाल में शामिल सभी सदस्यों को हटाने की संभावना है। इस बार नए चेहरों को शामिल किया जा सकता है, जिसमें पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का नाम भी शामिल है। जानें इस बदलाव के पीछे की वजह और कौन हो सकते हैं नए सदस्य।
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भाजपा संसदीय बोर्ड में संभावित बदलाव


भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के संसदीय बोर्ड के पुनर्गठन की चर्चा तेज हो गई है, खासकर जब पार्टी की राष्ट्रीय टीम के गठन और संभावित सरकार में फेरबदल की अटकलें चल रही हैं। यह बोर्ड भाजपा की सर्वोच्च निर्णय लेने वाली इकाई है, और इसकी बैठकें आमतौर पर तब होती हैं जब किसी राज्य में चुनाव नजदीक होते हैं या जब उम्मीदवारों के नाम तय किए जाते हैं।


सूत्रों के अनुसार, पिछले कार्यकाल में शामिल किए गए सभी सदस्यों को हटाने का निर्णय लिया जा सकता है। पिछली बार बीएस येदियुरप्पा, सत्यनारायण जटिया, इकबाल सिंह लालपुरा और के लक्ष्मण जैसे नेताओं को शामिल किया गया था, लेकिन इस बार उनकी जगह नए चेहरों को लाने की संभावना है।


असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्बानंद सोनोवाल का भी नाम चर्चा में है, लेकिन यह स्पष्ट नहीं है कि वे इस बार बोर्ड में रहेंगे या नहीं। ध्यान देने योग्य बात यह है कि भाजपा का राष्ट्रीय अध्यक्ष इस बोर्ड का स्वाभाविक अध्यक्ष होता है, और यदि पार्टी सत्ता में है, तो प्रधानमंत्री भी इसके सदस्य होते हैं।


पूर्व प्रधानमंत्री और सभी पूर्व अध्यक्षों को भी इस बोर्ड में शामिल किया जाता है, लेकिन नितिन गडकरी इस परंपरा से बाहर हैं। इसका मतलब यह है कि पूर्व अध्यक्षों को भी बाहर रखा जा सकता है। वर्तमान में राजनाथ सिंह, अमित शाह और जेपी नड्डा जैसे पूर्व अध्यक्ष इसके सदस्य हैं। विभिन्न राज्यों के कई वरिष्ठ नेता इस बोर्ड में शामिल होने के लिए प्रयासरत हैं।