भारत, अमेरिका और यूएई के बीच कूटनीतिक वार्ता: तनाव और ऊर्जा पर चर्चा
कूटनीति का पर्दे के पीछे का खेल
अंतरराष्ट्रीय कूटनीति में जो कुछ भी सामने आता है, वह हमेशा वास्तविकता का प्रतिनिधित्व नहीं करता। असली गतिविधियाँ अक्सर पर्दे के पीछे होती हैं। सार्वजनिक रूप से बयान दिए जाते हैं, गर्मजोशी से हाथ मिलाए जाते हैं, और समझौतों की बातें की जाती हैं। लेकिन असली खेल रणनीतिक हितों, दबाव और सौदेबाजी के इर्द-गिर्द घूमता है। कूटनीति एक शतरंज की बिसात की तरह है, जहां हर चाल स्पष्ट नहीं होती और हर खामोशी का अर्थ भिन्न हो सकता है। कूटनीति का असली खेल उन निर्णयों में छिपा होता है जो आम जनता के सामने नहीं आते। हाल ही में मुंबई में अमेरिकी विदेश मंत्री मार्को रूबियो की यात्रा के दौरान कुछ ऐसा ही देखने को मिला।
भारत और अमेरिका के बीच महत्वपूर्ण वार्ता हुई, जबकि इसी समय अमेरिका के विदेश मंत्री और भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर की बैठक की खबरें चर्चा में थीं। अचानक यूएई के विदेश मंत्री शेख अब्दुल्ला की उपस्थिति ने सभी को चौंका दिया।
यूएई की अप्रत्याशित एंट्री
यह चौंकाने वाला था क्योंकि बैठक अमेरिका और भारत के बीच चल रही थी, और यूएई का इसमें शामिल होना सवाल उठाता है। क्या अमेरिका, भारत और यूएई ने मिलकर कोई बड़ा योजना बनाई है? वास्तव में, तीनों देशों के नेताओं के बीच त्रिपक्षीय बैठक में ऊर्जा, सुरक्षा, कनेक्टिविटी और क्षेत्रीय हालात पर चर्चा की गई। यूएई का इस बैठक में शामिल होना महत्वपूर्ण है, खासकर जब मिडिल ईस्ट में तनाव बढ़ रहा है।
यूएई वर्तमान में रूस के बाद भारत का एक प्रमुख और रणनीतिक कच्चे तेल का सप्लायर है। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने एक हफ्ते में दूसरी बार यूएई के विदेश मंत्री से बातचीत की, जिसमें उन्होंने खाड़ी क्षेत्र की स्थिति पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि भारत क्षेत्र में शांति स्थापित करने के लिए कूटनीति और बातचीत के प्रयासों का समर्थन करता रहेगा।
भारत-यूएई संबंधों की मजबूती
जनवरी में यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद भारत आए थे, और फरवरी में क्राउन प्रिंस शेख खालिद ने एआई इंपैक्ट समिट और ब्रिक्स समिट में भाग लिया था। इसके अलावा, मई में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने यूएई की आठवीं यात्रा की थी। भारत और यूएई के बीच संबंध ऐतिहासिक, आर्थिक और रणनीतिक दृष्टि से मजबूत हैं। दोनों देशों ने फरवरी 2022 में एक महत्वपूर्ण आर्थिक साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे, जिससे द्विपक्षीय व्यापार 100 अरब डॉलर के पार पहुंच गया है।
ऊर्जा, रक्षा तकनीक और 35 लाख से अधिक भारतीय प्रवासियों के संबंध में दोनों देश निकट सहयोगी हैं। ऐसे में यूएई के विदेश मंत्री का भारत आना, वह भी अमेरिका के विदेश मंत्री की यात्रा के दौरान, विशेष महत्व रखता है। तीनों देशों के नेताओं के बीच मिडिल ईस्ट में तनाव और कच्चे तेल पर बातचीत हुई है, जिसका प्रभाव जल्द ही देखने को मिल सकता है। अमेरिका भी भारत के साथ अंतिम समझौते की बात कर चुका है।
