भारत और अमेरिका के बीच रक्षा और परमाणु सहयोग में वृद्धि
भारत और अमेरिका का बढ़ता सहयोग
(सागर कुलकर्णी) वाशिंगटन, 28 जुलाई - अमेरिका के सहायक विदेश मंत्री एस. पॉल कपूर ने बताया कि अमेरिका और भारत के बीच रक्षा और असैन्य परमाणु क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ावा दिया जा रहा है। इसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा (एआई) और अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर जोर दिया जा रहा है। कपूर ने यह जानकारी हूवर इंस्टीट्यूशन में आयोजित एक गोलमेज सम्मेलन में साझा की, जिसमें पूर्व विदेश मंत्री कोंडोलीजा राइस और भारत में अमेरिका के पूर्व राजदूत डेविड सी. मुलफोर्ड भी शामिल हुए।
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में कपूर ने कहा, “इस प्रशासन के दौरान भारत के साथ अमेरिका की बढ़ती साझेदारी से नए रोजगार के अवसर उत्पन्न हो रहे हैं। इसके साथ ही, ऐसी आपूर्ति श्रृंखलाएं भी मजबूत हो रही हैं जो अमेरिका और पूरे क्षेत्र के लिए महत्वपूर्ण हैं।”
उन्होंने आगे कहा, “हम रक्षा और असैन्य परमाणु सहयोग को विस्तारित कर रहे हैं, जिसमें विश्वसनीय कृत्रिम मेधा और अर्थव्यवस्था को गति देने वाली अन्य उभरती प्रौद्योगिकियों को अपनाने पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।”
पिछले वर्ष, भारत और अमेरिका ने थल, जल, आकाश, अंतरिक्ष और साइबर क्षेत्रों में संबंधों को मजबूत करने के लिए एक महत्वपूर्ण रक्षा साझेदारी समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। 2002 के बाद से, भारत ने अमेरिका से कई आधुनिक रक्षा प्रणालियां खरीदी हैं, जिनमें अपाचे और चिनूक हेलीकॉप्टर, सी-17 और सी-130जे परिवहन विमान, पी-8आई समुद्री गश्ती विमान और एम777 होवित्जर तोपें शामिल हैं।
अमेरिका की परमाणु ऊर्जा कंपनियां भारत के असैन्य परमाणु क्षेत्र में निवेश और सहयोग की संभावनाओं को लेकर उत्साहित हैं। इस वर्ष की शुरुआत में, नई दिल्ली द्वारा ‘शांति’ कानून के तहत दायित्व संबंधी प्रावधानों में ढील दिए जाने के बाद, परमाणु उद्योग के वरिष्ठ अधिकारियों का एक प्रतिनिधिमंडल भारत में निजी क्षेत्र के साथ सहयोग की संभावनाएं तलाशने के लिए आया था।
