भारत और इजराइल ने पाकिस्तान के प्रस्ताव के खिलाफ संयुक्त राष्ट्र में किया मतदान
संयुक्त राष्ट्र में प्रस्ताव पर मतदान
संयुक्त राष्ट्र के हॉल में एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव पर मतदान के लिए सभी देशों के प्रतिनिधियों को बुलाया गया। इस दौरान भारत और इजराइल के डिप्लोमेट्स भी उपस्थित थे। मतदान शुरू हुआ और इस दौरान भारत और इजराइल ने एक ऐसा कदम उठाया, जिसने कई देशों को चौंका दिया। दरअसल, यह प्रस्ताव पाकिस्तान द्वारा पेश किया गया था, जिसका उद्देश्य था कि विभिन्न देशों में पारंपरिक हथियारों की संख्या पर नियंत्रण रखा जाए। इसका मतलब था कि भारत को अपने हथियारों की संख्या को सीमित करना होगा और इसके लिए पाकिस्तान के साथ बातचीत करनी होगी।
इस प्रस्ताव के पक्ष में 182 देशों को वोट देने के लिए आमंत्रित किया गया था, जिनमें से 180 देशों ने पाकिस्तान के पक्ष में मतदान किया। लेकिन भारत और इजराइल ने इस प्रस्ताव के खिलाफ वोट दिया।
भारत की सुरक्षा चिंताएं
भारत ने स्पष्ट किया है कि वह अपनी सुरक्षा को केवल पाकिस्तान के संदर्भ में नहीं देख सकता। रिपोर्टों के अनुसार, कई देशों ने भारत को इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट देने के लिए मनाने की कोशिश की, लेकिन भारत ने अपनी स्थिति पर अडिग रहते हुए मतदान किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यह प्रस्ताव चीन की ओर से आया था, जो पाकिस्तान के माध्यम से भारत को दबाव में लाना चाहता था।
भारत ने हाल के वर्षों में स्वदेशी मिसाइलों का परीक्षण किया है, जो चीन के लिए चिंता का विषय बन गई हैं। भारत ने अपने पड़ोसी देशों में ब्रह्मोस मिसाइलें भी तैनात की हैं। इस संदर्भ में, भारतीय डिप्लोमेट अनमोल शेर बेदी ने कहा कि हमारी सुरक्षा केवल पाकिस्तान की सीमाओं तक सीमित नहीं है।
भारत और इजराइल का एकजुटता
अनमोल शेर बेदी ने यह भी कहा कि पाकिस्तान इस प्रस्ताव के माध्यम से अपनी कूटनीति को बढ़ावा देना चाहता है, लेकिन भारत ऐसा नहीं होने देगा। यदि भारत इस प्रस्ताव के पक्ष में वोट करता, तो यह उसकी राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा बन सकता था। इसके परिणामस्वरूप भारत की हथियारों की खरीद और परीक्षण पर गंभीर प्रतिबंध लग सकते थे।
भारत ने इस प्रस्ताव के खिलाफ अकेले मतदान किया, जिसके तुरंत बाद इजराइल ने भी भारत का समर्थन किया। इजराइल ने कहा कि उनकी सुरक्षा और चुनौतियां भारत के समान हैं, और यदि वे अपने पड़ोसी देशों के साथ हथियारों की संख्या सीमित करते हैं, तो इससे ईरान जैसे देशों से खतरा बढ़ सकता है।
