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भारत और ओमान के बीच रक्षा सहयोग: नई तकनीक से बढ़ेगा सुरक्षा स्तर

भारत और ओमान के बीच एक महत्वपूर्ण रक्षा समझौता हुआ है, जिसमें भारतीय डिफेंस कंपनी आईजी डिफेंस ने ओमान की एमएसए ग्लोबल के साथ मिलकर ड्रोन तकनीक का विकास करने का निर्णय लिया है। यह समझौता खाड़ी देशों की सुरक्षा आवश्यकताओं को ध्यान में रखते हुए किया गया है, जिससे स्थानीय स्तर पर रक्षा क्षमताओं को मजबूत किया जा सकेगा। जानें इस समझौते के पीछे की रणनीति और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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पश्चिम एशिया में सुरक्षा की नई चुनौतियाँ

पश्चिम एशिया में वर्तमान स्थिति ने वैश्विक सुरक्षा प्राथमिकताओं को पूरी तरह से बदल दिया है। ईरान से उत्पन्न तनाव, लगातार ड्रोन हमले, और लाल सागर से फारस की खाड़ी तक के खतरों ने खाड़ी देशों को अपनी रक्षा तैयारियों पर पुनर्विचार करने के लिए मजबूर कर दिया है। इसी बीच, एक महत्वपूर्ण खबर आई है जो भारत की बढ़ती शक्ति को अंतरराष्ट्रीय रक्षा बाजार में उजागर करती है। नोएडा स्थित आईजी डिफेंस ने ओमान की एमएसए ग्लोबल के साथ एक ऐतिहासिक समझौता किया है। इस समझौते के तहत, भारत के घातक अटैक ड्रोन और काउंटर ड्रोन सिस्टम का सह विकास और स्थानीय निर्माण किया जाएगा। भारत का 1000 किमी रेंज वाला लॉन्ग रेंज वन वे स्ट्राइक ड्रोन अब ओमान की जमीन से तैयार होकर पूरे मध्य पूर्व में उपलब्ध होगा।


ड्रोन युद्ध की नई परिभाषा

हाल के महीनों में ईरान और उसके समर्थित गुटों के बीच संघर्ष ने आधुनिक युद्ध की एक नई तस्वीर पेश की है, जिसमें सस्ते और प्रभावी ड्रोन शामिल हैं। ये ड्रोन तेल प्रतिष्ठानों, वाणिज्यिक जहाजों और सैन्य ठिकानों पर हमले कर रहे हैं, जिससे पारंपरिक रक्षा प्रणालियों के लिए एक बड़ा संकट उत्पन्न हो गया है।


ओमान की भौगोलिक स्थिति और सुरक्षा आवश्यकताएँ

ओमान, जो अरब सागर और ओमान की खाड़ी के मुहाने पर स्थित है, हमेशा से एक शांत और रणनीतिक मध्यस्थ देश रहा है। यह संवेदनशील समुद्री गलियारे के निकट है, जहां से विश्व का एक बड़ा तेल व्यापार गुजरता है। सऊदी अरब, यूएई और ओमान जैसे देशों ने महसूस किया है कि उन्हें अब केवल पश्चिमी देशों से महंगे हथियारों पर निर्भर नहीं रहना चाहिए। उन्हें स्वदेशी, आधुनिक और लागत प्रभावी तकनीक की आवश्यकता है, जो ड्रोन हमलों को रोक सके और जरूरत पड़ने पर सटीक जवाबी कार्रवाई कर सके।


ऐतिहासिक समझौते का महत्व

यह समझौता मस्किट में आयोजित एक विशेष रक्षा उद्योग कार्यक्रम में हुआ, जिसे भारत के रक्षा मंत्रालय और भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ के सहयोग से आयोजित किया गया था। इस साझेदारी को भारत सरकार का पूरा समर्थन प्राप्त है। समझौते पर हस्ताक्षर आईजी डिफेंस के फाउंडर और सीईओ बोधिसत्व संघप्रिया और एमएसए ग्लोबल के चेयरमैन कर्नल एम एस अटवाल ने किए। इस साझेदारी का मुख्य उद्देश्य भारत की स्वदेशी इंजीनियरिंग और रक्षा क्षमताओं को ओमान के औद्योगिक ढांचे के साथ जोड़ना है।


भविष्य की संभावनाएँ

भारतीय इंजीनियरिंग और ओमान की विनिर्माण क्षमता का यह मेल आने वाले समय में पूरे जीसीसी क्षेत्र की आवश्यकताओं को पूरा करेगा। इस समझौते के तहत आईजी डिफेंस के तीन प्रमुख प्लेटफार्मों को ओमान में सह विकसित और स्थानीय स्तर पर निर्मित करने की योजना है।