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भारत का यूएनएससी में स्थायी सदस्यता पर जोर, वीटो अधिकार की आवश्यकता

भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता के लिए वीटो अधिकार की आवश्यकता पर जोर दिया है। राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने कहा कि नए स्थायी सदस्यों की अलग श्रेणी बनाने से वे 'दूसरे दर्जे' के सदस्य बन जाएंगे। भारत ने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर भी प्रकाश डाला है, यह कहते हुए कि 1945 में बनी यह संस्था अब 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है। जानें भारत की स्थायी सदस्यता की मांग और आगामी चुनावों के बारे में।
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भारत की स्थिति पर प्रकाश

(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 27 अक्टूबर: भारत ने स्पष्ट किया है कि यदि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) में नए स्थायी सदस्यों के लिए एक अलग श्रेणी बनाई जाती है, तो वे वास्तव में ‘‘दूसरे दर्जे’’ के सदस्य बन जाएंगे। इस स्थिति में निर्णय लेने का अधिकार केवल वर्तमान पांच स्थायी सदस्यों के पास ही रहेगा। ये पांच सदस्य हैं: चीन, फ्रांस, रूस, ब्रिटेन और अमेरिका, जो सभी वीटो का अधिकार रखते हैं। इसके अलावा, परिषद में 10 अस्थायी सदस्य भी होते हैं, जिन्हें दो साल के लिए चुना जाता है।


वीटो अधिकार पर भारत का रुख

भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत हरीश पर्वतनेनी ने सोमवार को कहा कि जब तक वीटो का प्रावधान मौजूद है, तब तक सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए। उन्होंने कहा कि निष्पक्षता और न्याय के लिए आवश्यक है कि सभी स्थायी सदस्यों के अधिकार और जिम्मेदारियां समान हों। उन्होंने दोहराया कि जब तक वीटो का प्रावधान है, तब तक सुधार के बाद सभी स्थायी सदस्यों को यह अधिकार मिलना चाहिए।


सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता

पर्वतनेनी ने संयुक्त राष्ट्र महासभा में ‘वीटो के सवाल पर विषयवार चर्चा’ के दौरान कहा कि यदि सुरक्षा परिषद में सुधार के तहत वीटो के अधिकार के बिना स्थायी सदस्यों की एक नई श्रेणी बनाई जाती है, तो इससे उन देशों को ‘‘दूसरे दर्जे’’ का सदस्य बना दिया जाएगा। इससे पी5 के निर्णय लेने की प्रक्रिया में कोई बदलाव नहीं आएगा। भारत ने स्थायी और अस्थायी दोनों श्रेणियों में सदस्यों की संख्या बढ़ाने की मांग की है।


भारत की स्थायी सदस्यता की मांग

भारत सुरक्षा परिषद में सुधार के प्रयासों में सबसे आगे रहा है। भारत का मानना है कि 1945 में स्थापित यह संस्था 21वीं सदी की आवश्यकताओं के अनुरूप नहीं है और वर्तमान भू-राजनीतिक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाती। भारत ने यह भी कहा है कि वह सुरक्षा परिषद में स्थायी सदस्यता का उचित हकदार है।


भारत की अस्थायी सीट के लिए कोशिश

भारत 2028-29 के कार्यकाल के लिए सुरक्षा परिषद में अस्थायी सीट पाने की कोशिश कर रहा है। इस चुनाव का आयोजन अगले साल जून में होगा, जिसमें एशिया-प्रशांत समूह के लिए एकमात्र सीट के लिए भारत और ताजिकिस्तान के बीच मुकाबला होगा। भारत इससे पहले 2021-22 में सुरक्षा परिषद का सदस्य रह चुका है, जो उसका आठवां कार्यकाल था।