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भारत की ऊर्जा संरचना ने मध्य पूर्व तनाव में दी मजबूती

भारत ने पिछले एक दशक में अपनी ऊर्जा संरचना को मजबूत किया है, जिससे उसने मध्य पूर्व में उत्पन्न तनाव का सफलतापूर्वक सामना किया है। हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद, देश ने पेट्रोल और एलपीजी की आपूर्ति को बनाए रखा। पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत ने कच्चे तेल की स्थिति को सुरक्षित रखने के लिए विभिन्न स्रोतों से आयात बढ़ाया है। इसके अलावा, एथेनॉल ब्लेंडिंग और घरेलू उत्पादन में वृद्धि ने भी मदद की है। जानें इस संकट के दौरान भारत की ऊर्जा नीति और उसके प्रभाव के बारे में।
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भारत की ऊर्जा सुरक्षा में सुधार

नई दिल्ली : भारत ने मध्य पूर्व में उत्पन्न तनाव का सामना करने में अन्य देशों की तुलना में बेहतर प्रदर्शन किया है। इसका मुख्य कारण पिछले एक दशक में विकसित की गई ऊर्जा संरचना है, जिसने हॉर्मुज स्ट्रेट के बंद होने के बावजूद पेट्रोल और एलपीजी की आपूर्ति को सुचारू बनाए रखा। यह जानकारी सरकार ने साझा की है।


पेट्रोलियम मंत्रालय के अनुसार, भारत कच्चे तेल की स्थिति को केवल स्टॉक पर निर्भर नहीं करता, बल्कि विभिन्न स्रोतों से तेल आयात कर इसे सुरक्षित रखता है। अब देश को तेल आपूर्ति करने वाले देशों की संख्या 27 से बढ़कर 41 हो गई है, जिसमें लीबिया, गैबॉन, इक्वेटोरियल गिनी और गुयाना जैसे नए देश शामिल हैं। अमेरिका और रूस से भी तेल की आपूर्ति में वृद्धि हुई है।


मंत्रालय ने बताया कि रूटिंग में बदलाव के कारण अब भारत का बहुत कम कच्चा तेल हॉर्मुज से होकर गुजरता है। आईएसपीआरएल के तहत रणनीतिक रिजर्व में लगभग 5.33 मिलियन टन तेल उपलब्ध है, जो लगभग तीन हफ्ते की जरूरत को पूरा कर सकता है।


भारत उन देशों में से एक है जिसने हॉर्मुज स्ट्रेट से अपने कार्गो की आवाजाही को जारी रखा और किसी भी पेट्रोलियम उत्पाद की कमी का सामना नहीं किया।


इसके अतिरिक्त, एथेनॉल ब्लेंडिंग का स्तर 20 प्रतिशत तक पहुंचने से कच्चे तेल के आयात में भारी बचत होती है।


कच्चे तेल की कीमतें अब लगभग 74 डॉलर प्रति बैरल पर आ गई हैं, जो मध्य पूर्व संकट से पहले के स्तर के करीब है। स्ट्रेट से टैंकरों की आवाजाही फिर से शुरू होने के साथ कीमतें और भी कम हो रही हैं।


मंत्रालय ने कहा कि आवाजाही पूरी तरह से सामान्य होने में समय लगेगा, क्योंकि अभी भी बारूदी सुरंगों को हटाने और बड़े जहाजों के जमावड़े को निपटाने का कार्य बाकी है। हालांकि, आपूर्ति में रुकावट का सबसे बुरा दौर अब समाप्त हो चुका है।


पेट्रोल और डीजल की कीमतों में झटके का असर ग्राहकों पर नहीं पड़ा, बल्कि इसे सरकार ने संभाला। केंद्र सरकार ने 27 मार्च, 2026 को पेट्रोल और डीजल पर सेंट्रल एक्साइज ड्यूटी में 10 रुपए प्रति लीटर की कटौती की। इसके तहत पेट्रोल पर स्पेशल एडिशनल एक्साइज को 13 रुपए से घटाकर 3 रुपए और डीजल पर 10 रुपए से घटाकर शून्य कर दिया गया। इस कदम से सरकार को लगभग 1.7 लाख करोड़ रुपए का राजस्व नुकसान हुआ।


इसके बाद, मार्केटिंग कंपनियों ने दो महीने से अधिक समय तक रिटेल कीमतें नहीं बढ़ाईं, जबकि कच्चे तेल की कीमतें 120 डॉलर से ऊपर चली गई थीं और उन्हें रोजाना लगभग एक हजार करोड़ रुपए का नुकसान हो रहा था।


जब कीमतों में बदलाव करना आवश्यक हो गया, तो 15 मई को प्रति लीटर 3 रुपए की एक बार की बढ़ोतरी की गई, जो किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम थी।


संकट के समय से तुलना करने पर, भारत में पेट्रोल पंप की कीमतों में वृद्धि किसी भी बड़ी अर्थव्यवस्था के मुकाबले सबसे कम रही है। भारत में पेट्रोल की कीमतों में कुल मिलाकर लगभग 7.5 रुपए प्रति लीटर की बढ़ोतरी हुई।


एलपीजी की स्थिति सबसे बड़ी चुनौती और सफलता रही। भारतीय रसोई में आने वाली आधी से अधिक कुकिंग गैस खाड़ी देशों से आती थी, और आपूर्ति में रुकावट के कारण इसका एक बड़ा हिस्सा अचानक बंद हो गया।


आपूर्ति में रुकावट के आठ दिनों के भीतर ही एलपीजी कंट्रोल ऑर्डर जारी किया गया, जिसमें सभी रिफाइनरियों को प्रोपेन, ब्यूटेन, प्रोपलीन और ब्यूटीन स्ट्रीम्स का उपयोग करके अधिकतम उत्पादन करने का निर्देश दिया गया।


मंत्रालय ने बताया, “सात दिनों के भीतर, घरेलू उत्पादन 35,000 टन से बढ़कर 54,000 टन प्रतिदिन हो गया। यह मात्रा लगभग 30,000 मीट्रिक टन प्रतिदिन की बची हुई आयात की जरूरत से कहीं अधिक थी, जिससे कमी को काफी हद तक घरेलू उत्पादन से ही पूरा कर लिया गया।”


कीमत के मामले में भी ग्राहकों का ध्यान रखा गया। 14.2 किलो वाले सिलेंडर की इंपोर्ट-लिंक्ड लागत 1,600 रुपए से अधिक होने के बावजूद, किसी भी घर के लिए तय कीमत 942 रुपए ही रखी गई। वहीं, प्रधानमंत्री उज्ज्वला योजना के लाभार्थियों के लिए रिफिल पर 300 रुपए का डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर मिलने के बाद प्रभावी कीमत 642 रुपए रही। इस योजना के तहत 10.58 करोड़ से अधिक कनेक्शन दिए गए हैं।


7 जून को घरेलू कुकिंग गैस (एलपीजी) की कीमतों में प्रति सिलेंडर सिर्फ 29 रुपए की बढ़ोतरी की गई थी।


आपूर्ति की स्थिति बेहतर होने पर, सरकार ने 25 जून को कमर्शियल और बल्क एलपीजी पर लगी पाबंदियां हटा लीं और नॉन-डोमेस्टिक सप्लाई को संकट से पहले के स्तर पर बहाल कर दिया।