भारत की मैन्युफैक्चरिंग में ऐतिहासिक सफलता: चीन को भी पीछे छोड़ने की तैयारी
भारत की नई मैन्युफैक्चरिंग रणनीति
भारत के खिलाफ एक बड़ी सूचना युद्ध की शुरुआत होने वाली है, क्योंकि हाल ही में एक ऐसा खुलासा हुआ है जिसने रूस, चीन, अमेरिका और यूरोप के लोगों को चौंका दिया है। यह जानकारी भारत के लिए एक अवसर है, जबकि इसके विरोधियों के लिए यह एक संकट का संकेत है। इस महत्वपूर्ण खबर पर चर्चा अब अंतरराष्ट्रीय मीडिया में भी होने लगी है। भारत ने एक बार फिर से उल्टी गंगा बहने की कहावत को सच साबित कर दिया है। एक ओर, भारत चीन को मैन्युफैक्चर किए गए सामान बेच रहा है, वहीं दूसरी ओर, यह सऊदी अरब और संयुक्त अरब अमीरात से भी अधिक पेट्रोल और डीजल कई देशों को निर्यात कर रहा है। यह दोनों घटनाएं ऐतिहासिक रूप से पहली बार हो रही हैं।
हालांकि, चीन अभी भी भारत को अधिक सामान बेचता है, लेकिन हाल के समय में भारत ने जो उपलब्धियां हासिल की हैं, वे अद्वितीय हैं। पिछले वित्तीय वर्ष में, भारत ने चीन को इलेक्ट्रॉनिक्स का निर्यात तीन गुना बढ़ाकर 3.18 अरब डॉलर तक पहुंचा दिया है, और इस वर्ष भी इसमें 15% से अधिक की वृद्धि जारी है। इसमें स्मार्टफोन, प्रिंटेड सर्किट बोर्ड, डिस्प्ले, मॉड्यूल और टेलीकॉम उपकरण शामिल हैं।
इंजीनियरिंग सामानों जैसे ऑटो कंपोनेंट्स, मशीनरी पार्ट्स और हैंड टूल्स के निर्यात में भी 21% की वृद्धि हुई है। यह पहली बार है जब भारत इलेक्ट्रॉनिक्स और मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्रों में चीन के घरेलू बाजार में अपनी जगह बना चुका है। जो चीन पहले पूरी दुनिया को इलेक्ट्रॉनिक्स बेचता था, अब वही भारत में बने कंपोनेंट्स खरीद रहा है। यह भारत की मैन्युफैक्चरिंग क्षमता की एक बड़ी जीत है।
इस साल अप्रैल से अगस्त के बीच, ब्रिक्स देशों को भारत का निर्यात 34% बढ़कर 19.9 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें चीन, दक्षिण अफ्रीका, ब्राजील और रूस शामिल हैं।
भारत के निर्यात में चीन को 39% और दक्षिण अफ्रीका को 58% की वृद्धि देखी गई है। इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में भारत ने अमेरिका में भी अपनी उपस्थिति दर्ज कराई है, जिसमें स्मार्टफोन की महत्वपूर्ण भूमिका रही है। 2015 में भारत ने अमेरिका को 6 अरब डॉलर के इलेक्ट्रॉनिक उत्पाद बेचे थे, जो 2025 में 38 अरब डॉलर तक पहुंचने की उम्मीद है।
2024 में अमेरिका ने चीन से 11 करोड़ स्मार्टफोन खरीदे थे, जबकि भारत से केवल 50 लाख। लेकिन 2025 के पहले पांच महीनों में, चीन ने अमेरिका को 2.94 करोड़ स्मार्टफोन बेचे, जबकि भारत ने 2.13 करोड़ स्मार्टफोन बेचे। इसका मतलब है कि अमेरिका के बाजार में भी भारत चीन को पीछे छोड़ने की ओर अग्रसर है। इसके अलावा, भारत ने तेल के बाजार में भी महत्वपूर्ण कदम उठाए हैं।
