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भारत की राजनीति में जेन जी की बढ़ती पहचान

भारतीय राजनीति में 'जेन जी' की चर्चा तेजी से बढ़ रही है। यह शब्द अब नेताओं के भाषणों में सुनाई दे रहा है। एक हालिया रिपोर्ट में 29 साल से कम उम्र के सांसदों और विधायकों की सूची सामने आई है, जिसमें अधिकांश राजनीतिक परिवारों से हैं। जानें कैसे यह नई पीढ़ी राजनीति में अपनी पहचान बना रही है और राजनीतिक विरासत का प्रभाव क्या है।
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जेन जी का प्रभाव

इन दिनों भारतीय राजनीति में नई पीढ़ी, जिसे 'जेन जी' कहा जाता है, की चर्चा जोरों पर है। यह शब्द अब हर नेता की जुबान पर है। जब नेपाल में आंदोलन के दौरान यह शब्द पहली बार सुना गया, तो कई नेता इसे चीन के किसी व्यक्ति से जोड़कर देख रहे थे। लेकिन अब भारत की संसद में नेता इस शब्द का उपयोग कर भाषण दे रहे हैं। दिल्ली के जंतर मंतर पर हुए आंदोलन को भी 'जेन जी' का आंदोलन कहा गया। इसके बाद एक रिपोर्ट में बताया गया कि देशभर में 29 साल से कम उम्र के सांसदों और विधायकों की एक सूची बनाई गई है।


इस सूची में अधिकतर नाम ऐसे सांसदों और विधायकों के हैं, जो राजनीतिक परिवारों से आते हैं। सांसदों में यह स्थिति अधिक स्पष्ट है। रिपोर्ट के अनुसार, 543 सांसदों में से केवल छह ऐसे हैं, जो 29 साल से कम उम्र के हैं। इनमें से केवल कांग्रेस की संजना जाटव ही एकमात्र हैं, जो राजनीतिक परिवार से नहीं आतीं। यदि विधायकों की बात करें, तो देश में 4300 से अधिक विधायकों में से केवल 20 विधायक 'जेन जी' के हैं, जिनमें से आठ किसी न किसी राजनीतिक परिवार से हैं। यह दर्शाता है कि पहले राजनीतिक विरासत के बिना भी नेता सफल हो जाते थे, लेकिन अब ऐसा होना कठिन होता जा रहा है। अब राजनीतिक परिवारों से बाहर के युवाओं को राजनीति में सफल होने के लिए अधिक मेहनत करनी पड़ेगी।