भारत के T72 टैंकों के आधुनिकीकरण के लिए रूस की पेशकश
रूस की तकनीकी सहायता का प्रस्ताव
1970 के अंत में, भारतीय सेना ने सोवियत संघ से T72 नामक एक लड़ाकू बख्तरबंद वाहन को शामिल किया, जिसने भारत की सीमाओं पर एक मजबूत सुरक्षा दीवार खड़ी की। यह बख्तरबंद वाहन, जो राजस्थान के थार मरुस्थल से लेकर पूर्वी लद्दाख की ऊंची बर्फीली चोटियों तक फैला हुआ है, ने दशकों तक पाकिस्तान और चीन के मंसूबों को विफल किया। लेकिन अब युद्ध के मैदान में बदलाव आ चुका है। यूक्रेन युद्ध ने यह स्पष्ट कर दिया है कि केवल भारी टैंक ही पर्याप्त नहीं हैं। यदि टैंक में आधुनिक तकनीक, तेज निर्णय लेने की क्षमता और सुरक्षा कवच नहीं है, तो वह दुश्मन के सस्ते ड्रोन का शिकार बन सकता है। इसी संदर्भ में, रूस ने भारत को एक महत्वपूर्ण प्रस्ताव दिया है।
रूस की प्रमुख टेक्नोलॉजी कंपनी ने भारत के सामने अपने पुराने T72 टैंकों को अपग्रेड करने के लिए सहयोग की पेशकश की है। रूस का संदेश स्पष्ट है कि यदि भारत अपने T72 टैंकों को आधुनिक बनाना चाहता है, तो वह तकनीकी सहायता देने के लिए तैयार है, और वह भी भारत की धरती पर, मेक इन इंडिया के तहत।
रूस की टैंक निर्माता कंपनी उराल वागोन जावोट के सीईओ एलेक्जेंडर पोतापो ने बताया कि दोनों देशों के बीच इस विषय पर बातचीत चल रही है। हालांकि, अभी तक भारत सरकार की ओर से कोई औपचारिक अनुरोध नहीं आया है। यदि दोनों देशों के बीच उच्च स्तर पर सहमति बनती है, तो रूस अपनी तकनीकी विशेषज्ञता के साथ सहयोग करने को तैयार है।
इस प्रस्ताव के दो महत्वपूर्ण पहलू हैं। पहला, रूस ने स्पष्ट किया है कि यह प्रस्ताव अभी बातचीत के चरण में है। भारत ने अपने विकल्प खुले रखे हैं और जल्दबाजी में कोई निर्णय नहीं लिया है।
दूसरा पहलू यह है कि रूस जानता है कि अब वह समय नहीं है जब भारत केवल विदेशी कारखानों से सीधे हथियार खरीदता था। पोतापो ने तमिलनाडु के हैवी व्हीकल फैक्ट्री का उल्लेख किया, यह दर्शाता है कि रूस समझता है कि यदि सौदा होता है, तो यह भारत की शर्तों पर होगा।
भारतीय सेना की बख्तरबंद ताकत दुनिया की सबसे बड़ी ताकतों में से एक है। हमारे पास आधुनिक T90 टैंक और स्वदेशी अर्जुन एमबीटी हैं, लेकिन आज भी लगभग 2400 T72 टैंक हमारी रीढ़ हैं। जब भारत ने इन्हें शामिल किया था, तब ये अपने समय के सबसे आधुनिक टैंक थे। लेकिन पिछले चार दशकों में टैंक विरोधी तकनीकों में काफी बदलाव आया है। हालिया युद्धों ने यह साबित कर दिया है कि आधुनिक युद्ध क्षेत्र में एक टैंक के लिए नाइट विजन और हंटर किलर क्षमताएं आवश्यक हैं। पुराने T72 में रात में लक्ष्य साधने की क्षमता सीमित थी।
