Newzfatafatlogo

भारत-चीन संबंधों में नई शुरुआत: मोदी और जिनपिंग की द्विपक्षीय वार्ता

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच नई दिल्ली में हुई द्विपक्षीय वार्ता ने भारत-चीन संबंधों में एक नई दिशा दी है। यह मुलाकात 2020 में गलवान घाटी की हिंसक झड़प के बाद से दोनों नेताओं की पहली औपचारिक बातचीत है। वार्ता में सीमा पर शांति, व्यापारिक संबंधों में सुधार, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान पर चर्चा की गई। जानें इस महत्वपूर्ण मुलाकात के मुख्य बिंदु और भविष्य की संभावनाएं।
 | 

प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति जिनपिंग की मुलाकात


नई दिल्ली में ब्रिक्स शिखर सम्मेलन के दौरान, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग के बीच एक महत्वपूर्ण द्विपक्षीय वार्ता का आयोजन हुआ। यह मुलाकात 2020 में पूर्वी लद्दाख की गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद से दोनों नेताओं की पहली औपचारिक बातचीत है। वार्ता की शुरुआत में, राष्ट्रपति जिनपिंग ने कहा कि भारत और चीन एक-दूसरे की ताकतों से सीखकर साझा विकास की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं। उन्होंने ब्रिक्स सहयोग को बढ़ावा देने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग की आवश्यकता पर जोर दिया।


शी जिनपिंग का लगभग सात साल बाद भारत दौरा

चीन के राष्ट्रपति शी जिनपिंग ने लगभग सात साल बाद भारत की यात्रा की है। उनका पिछला दौरा अक्टूबर 2019 में अनौपचारिक शिखर सम्मेलन के लिए ममल्लापुरम में हुआ था। उस यात्रा के कुछ महीनों बाद, पूर्वी लद्दाख में दोनों देशों की सेनाओं के बीच सैन्य गतिरोध उत्पन्न हो गया था। जून 2020 में गलवान घाटी की घटना के बाद, द्विपक्षीय संबंधों में तनाव बढ़ गया, जिसे सामान्य करने के लिए कई वर्षों तक बातचीत चलती रही।


गश्ती समझौता और संवाद की बहाली

अक्टूबर 2024 में वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर गश्ती व्यवस्था को लेकर हुए समझौते ने सैन्य गतिरोध को कम करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इसी समझौते के बाद, रूस के कज़ान में आयोजित ब्रिक्स सम्मेलन के दौरान मोदी और जिनपिंग की मुलाकात संभव हो सकी। हालांकि, 3,500 किलोमीटर लंबी सीमा पर विवाद अब भी हल नहीं हुआ है और दोनों देश अपनी सैन्य उपस्थिति बनाए हुए हैं। भारत ने बार-बार कहा है कि सामान्य द्विपक्षीय संबंधों के लिए सीमा पर शांति और स्थिरता आवश्यक है।


अरुणाचल प्रदेश सीमा पर तनाव और कोर कमांडर वार्ता

यह वार्ता ऐसे समय में हुई है जब अरुणाचल प्रदेश से सटे पूर्वी क्षेत्र में हालिया घटनाक्रमों के कारण तनाव फिर से बढ़ गया है। 6 सितंबर को भारत और चीन के सैन्य कमांडरों के बीच वाचा-दमाई बीपीएम प्वाइंट पर कोर कमांडर स्तर की बैठक हुई थी। यह बैठक अरुणाचल प्रदेश के ऊपरी सुबनसिरी जिले में चीनी गतिविधियों की रिपोर्टों के बाद आयोजित की गई थी। भारत ने हमेशा यह स्पष्ट किया है कि अरुणाचल प्रदेश देश का एक अभिन्न हिस्सा है।


हवाई सेवाएं, वीजा और कैलास मानसरोवर यात्रा की बहाली

सीमा पर तनाव कम करने के साथ-साथ, दोनों देशों ने नागरिक और व्यापारिक संबंधों को सुधारने के लिए कई कदम उठाए हैं। पांच साल के अंतराल के बाद सीधी उड़ानें फिर से शुरू की गई हैं, वीजा प्रक्रियाओं को सरल बनाया गया है, और सीमा व्यापार के साथ-साथ 'कैलास मानसरोवर यात्रा' जैसे सांस्कृतिक आदान-प्रदान को बहाल करने की दिशा में प्रगति हुई है। पिछले महीने बीजिंग में भारत के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल और चीनी विदेश मंत्री वांग यी के बीच 25वें दौर की विशेष प्रतिनिधियों की वार्ता भी आयोजित की गई थी।


व्यापार घाटा और आर्थिक संबंध सुधारने की चुनौती

तनाव के बावजूद, 2025-26 में चीन भारत का सबसे बड़ा वस्तु व्यापार भागीदार बना हुआ है। दोनों देशों के बीच कुल द्विपक्षीय व्यापार लगभग 151 अरब डॉलर तक पहुंच गया है, जिसमें भारत ने चीन से लगभग 131 अरब डॉलर का आयात किया, जबकि निर्यात केवल 19 अरब डॉलर का रहा। इस कारण भारत को लगभग 112 अरब डॉलर के भारी व्यापार घाटे का सामना करना पड़ रहा है। भारत चीन से मशीनरी और इलेक्ट्रॉनिक्स पर निर्भरता कम करने और भारतीय उत्पादों के लिए चीनी बाजार में बेहतर पहुंच की मांग कर रहा है।