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भारत-चीन संबंधों में सुधार: ऊर्जा क्षेत्र में नई पहल

भारत और चीन के बीच संबंधों में सुधार की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया गया है। भारत ने हाल ही में चीन की चार ऊर्जा कंपनियों को अपने ऊर्जा क्षेत्र में टेंडर डालने की अनुमति दी है, जो दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंधों को मजबूत करने का संकेत है। हालांकि, यह कदम तब उठाया गया है जब भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा उसके रक्षा बजट से अधिक हो गया है। जानें, इस बदलाव के पीछे की वजहें और इसके संभावित प्रभाव क्या हो सकते हैं।
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भारत और चीन के बीच संबंधों में बदलाव


भारत और चीन के बीच संबंध अब फिर से सामान्य होते दिख रहे हैं। गलवान घाटी में हुई हिंसक झड़प के बाद दोनों देशों के बीच तनाव बढ़ गया था। हालांकि, इस दौरान भी चीन के साथ व्यापार में कमी नहीं आई। लेकिन भारत ने कुछ नियम और शर्तें लागू की थीं, जिनमें अब ढील दी जा रही है। हाल ही में, भारत ने चीन की चार ऊर्जा कंपनियों को अपने ऊर्जा क्षेत्र में टेंडर डालने की अनुमति दी है।


यहां तक कि जब अन्य देश चीन की ऊर्जा कंपनियों से दूरी बना रहे हैं, भारत ने इस दिशा में कदम बढ़ाया है। यह स्थिति तब और भी दिलचस्प हो जाती है जब भारत, जो चीन की विस्तारवादी नीतियों से सबसे अधिक प्रभावित है, इस तरह का कदम उठा रहा है।


भारत का चीन के साथ व्यापार घाटा अब उसके कुल रक्षा बजट से भी अधिक हो गया है। भारत का रक्षा बजट लगभग नौ लाख करोड़ रुपये है, जबकि चीन के साथ व्यापार घाटा सालाना 10 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो गया है। इसके बावजूद, भारत चीन के साथ व्यापार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है, जबकि चीन सीमा पर 'सलामी स्लाइसिंग' की रणनीति के तहत भारत की भूमि पर कब्जा करने का प्रयास कर रहा है।