भारत-चीन सीमा पर तनाव के बीच सेना प्रमुख का महत्वपूर्ण दौरा
सेना प्रमुख का दौरा और चीन को संदेश
भारत और चीन के बीच सीमा पर तनाव बढ़ता जा रहा है, जहां दोनों देशों के सैनिक आमने-सामने हैं। भारतीय सेना चीन को कड़ा जवाब देने के लिए तैयार है। इसी बीच, थल सेना प्रमुख जनरल धीरज सेठ ने एलएसी पर पहुंचकर एक महत्वपूर्ण संदेश दिया है, जिसने चीन में हलचल मचा दी है। हाल के दिनों में, चीन ने एलएसी पर तनाव बढ़ाने वाली गतिविधियों को अंजाम दिया है, लेकिन भारत भी उसे मुंहतोड़ जवाब देने में पीछे नहीं है। उदाहरण के लिए, अरुणाचल प्रदेश के बॉर्डर पर जब चीन के सैनिकों ने आंखें दिखाई, तो आईटीबीपी के जवानों ने उनकी हेकड़ी को तोड़ दिया। इसके बाद से चीन शांति की बातें करने लगा है। भारत अच्छी तरह जानता है कि चीन कितना विश्वासघाती है, इसलिए उसने सीमा पर अपनी स्थिति मजबूत करने का निर्णय लिया है।
जनरल धीरज सेठ ने उत्तराखंड के गढ़वाल सेक्टर में महतपुर फ्रंट रीजन का दौरा किया। उन्होंने गढ़वाल सेक्टर के माड़ा और जोशीमठ में भारतीय सेना की ऑपरेशनल तैयारियों का अवलोकन किया और सीमावर्ती क्षेत्रों के विकास के लिए सेना के प्रयासों की समीक्षा की। माड़ा भारत के सीमावर्ती क्षेत्र का पहला गांव है। सेना प्रमुख ने जवानों से बातचीत करते हुए उनकी समर्पण और दृढ़ता की सराहना की और उनमें उत्साह भरा।
सेना प्रमुख की सैनिकों के साथ बातचीत और तस्वीरें चीन के लिए चिंता का विषय बन सकती हैं। उन्होंने सैनिकों के बीच जाकर स्पष्ट किया कि किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए भारतीय सेना तैयार है। जनरल सेठ ने बदलती सुरक्षा चुनौतियों का सामना करने के लिए आधुनिक तकनीक के उपयोग और सैनिकों की तैयारी को मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि सीमाओं की सुरक्षा के लिए सैनिकों की क्षमता को लगातार बढ़ाना आवश्यक है। इससे पहले जुलाई में भी, सेना प्रमुख ने पूर्वोत्तर के संवेदनशील सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा किया था। भारत की उत्तरी और पूर्वोत्तर सीमाओं की सुरक्षा केवल सैनिकों की तैनाती तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की भौगोलिक परिस्थितियां और मौसम भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। इसलिए, जब सेना प्रमुख सीमावर्ती क्षेत्रों का दौरा करते हैं, तो इसका उद्देश्य केवल जवानों से मिलना नहीं होता, बल्कि उनका मनोबल बढ़ाना भी होता है।
