भारत-चीन सीमा पर हालात में सुधार: जिनपिंग की नई रणनीति
ब्रिक्स सम्मेलन में पुतिन और जिनपिंग की भूमिका
ब्रिक्स सम्मेलन में, पुतिन ने भारत के साथ अपनी गहरी दोस्ती का एक उदाहरण प्रस्तुत किया, जो सभी के लिए आश्चर्यजनक था। लेकिन इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि चीन के राष्ट्रपति जिनपिंग ने आतंकवाद के मुद्दे पर पाकिस्तान के खिलाफ भारत का समर्थन किया। यह पहली बार है जब उन्होंने भारत के साथ संबंध सुधारने के लिए ऐसी बातें की हैं, जो न केवल पाकिस्तान बल्कि अमेरिका के लिए भी चिंता का विषय बन गई हैं। जिनपिंग ने सीमा विवाद को सुलझाने पर सहमति जताई, जिससे भारत को भी हैरानी हुई है। हाल ही में, भारत-चीन सीमा से एक सकारात्मक खबर आई है, जो किसी ने भी उम्मीद नहीं की थी।
चीन की सेना की तैनाती में कमी
जिनपिंग के चीन लौटने के कुछ घंटों बाद, एलएसी से चीनी सेना की तैनाती में अचानक कमी आई है। रिपोर्ट के अनुसार, चीन ने अपनी तैनाती घटाई है, जबकि भारत ने अपनी स्थिति को और मजबूत किया है। रक्षा मंत्रालय की 2025-2026 की वार्षिक रिपोर्ट में बताया गया है कि उत्तरी सीमा पर चीनी पीपल्स लिबरेशन आर्मी (पीएलए) की तैनाती में महत्वपूर्ण कमी आई है। अब, उत्तरी सीमाओं पर लगभग 10 कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड तैनात हैं। भारत की तरफ से सभी एलएसी सेक्टर में सेना की तैनाती मजबूत बनी हुई है, और भारतीय सेना किसी भी चुनौती का सामना करने के लिए पूरी तरह तैयार है।
भारत-चीन के बीच बातचीत में प्रगति
रिपोर्ट में यह भी उल्लेख किया गया है कि भारत और चीन के बीच सकारात्मक राजनीतिक और सैन्य स्तर की बातचीत से उत्तरी सीमाओं पर स्थिरता आई है। दोनों देशों के बीच सैन्य स्तर पर बातचीत फिर से शुरू हो गई है, जिसमें अक्टूबर 2025 में पूर्वी लद्दाख में हुई 23वीं कोर कमांडर स्तर की बैठक शामिल है। सीमा से जुड़े मुद्दों को सुलझाने और तनाव कम करने के लिए प्रयास जारी हैं। इसके अलावा, सभी सेक्टरों में पीएलए के साथ बॉर्डर पर्सनल मीटिंग (बीपीएम) भी चल रही है। इन बैठकों का माहौल सौहार्दपूर्ण रहा है, जिससे दोनों पक्षों के मुद्दों को उठाने और सुलझाने में मदद मिल रही है। कुल मिलाकर, सीमा विवाद पर चीन ने अपने दृष्टिकोण में महत्वपूर्ण बदलाव किया है, जिसका परिणाम अब स्पष्ट हो रहा है।
