भारत ने UNSC में पाकिस्तान की जम्मू-कश्मीर पर टिप्पणियों की निंदा की
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद की एक अनौपचारिक बैठक में पाकिस्तान की जम्मू-कश्मीर पर की गई टिप्पणियों की कड़ी निंदा की है। भारत ने इसे अपने आंतरिक मामले के रूप में पेश किया और किसी भी तीसरे पक्ष की दखलअंदाज़ी को खारिज किया। राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान के प्रतिनिधि की टिप्पणियों पर आपत्ति जताते हुए कहा कि यह मामला पूरी तरह से भारत का है। इसके अलावा, उन्होंने सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जानें इस महत्वपूर्ण बैठक के बारे में और क्या कहा गया।
| Jun 24, 2026, 13:39 IST
भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
भारत ने संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) की एक अनौपचारिक बैठक में जम्मू-कश्मीर के मुद्दे को उठाने के लिए पाकिस्तान की तीखी आलोचना की है। भारत ने इसे बेवजह की टिप्पणी करार दिया और स्पष्ट किया कि यह मामला पूरी तरह से उसके आंतरिक मामलों से संबंधित है। यह प्रतिक्रिया UNSC की 'एरिया-फॉर्मूला' बैठक के दौरान आई, जिसका विषय 'कार्यान्वयन के अंतर को पाटना: सुरक्षा परिषद के प्रस्ताव और अंतरराष्ट्रीय शांति व सुरक्षा बनाए रखना' था। इस बैठक का आयोजन चीन और पाकिस्तान ने मिलकर किया था।
भारत का स्पष्ट संदेश
बैठक में भारत के स्थायी प्रतिनिधि राजदूत पर्वथानेनी हरीश ने पाकिस्तान के स्थायी प्रतिनिधि आसिम इफ्तिखार अहमद की टिप्पणियों पर आपत्ति जताई। हरीश ने कहा कि यह आश्चर्यजनक है कि एक सह-अध्यक्ष ने इस मंच का राजनीतिकरण करने का निर्णय लिया। उन्होंने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर का मामला भारत का आंतरिक मामला है और इसमें किसी भी तीसरे पक्ष की दखलअंदाज़ी को स्वीकार नहीं किया जाएगा।
UN चार्टर और विवाद समाधान
हरीश ने चर्चा के दौरान बताया कि यूएन चार्टर में विवादों को सुलझाने के लिए चैप्टर VI और VII के तहत विभिन्न तरीके दिए गए हैं। चैप्टर VII के उपाय शांति के लिए खतरा या आक्रामकता जैसी स्थितियों के लिए होते हैं, जबकि चैप्टर VI बातचीत और मध्यस्थता जैसे तरीकों पर जोर देता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा हालात को देखते हुए इन उपायों की समीक्षा की जानी चाहिए।
सुरक्षा परिषद में सुधार की आवश्यकता
भारत ने सुरक्षा परिषद के आदेशों की समय-समय पर समीक्षा की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने कहा कि जैसे UN महासभा के आदेशों की समीक्षा की जा रही है, वैसे ही सुरक्षा परिषद के ढांचे में भी सुधार की आवश्यकता है। भारत ने स्थायी सदस्यता की मांग की है, यह तर्क देते हुए कि मौजूदा ढांचा वैश्विक वास्तविकताओं को नहीं दर्शाता है।
