भारत ने पाकिस्तान को सिंधु जल समझौते पर कड़ा संदेश दिया
अंतरराष्ट्रीय मंच पर पाकिस्तान को मिला जवाब
वाशिंगटन: दशकों से भारत की उदारता का फायदा उठाते आ रहे पाकिस्तान को अब अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उसी की भाषा में जवाब मिलने लगा है। सिंधु जल समझौते (IWT) के स्थगन पर पाकिस्तान द्वारा उठाए जा रहे शोर के बीच, अमेरिका में भारत के राजदूत विनय मोहन क्वात्रा ने उसे स्पष्ट संदेश दिया है। एक प्रमुख पत्रिका में प्रकाशित अपने लेख में, क्वात्रा ने स्पष्ट किया कि जिस समझौते की नींव मित्रता और सद्भावना पर रखी गई थी, उसे पाकिस्तान ने अपनी आतंकवादी गतिविधियों और युद्ध के प्रयासों से नष्ट कर दिया है।
पाकिस्तान का आतंकवाद के प्रति रवैया
भारतीय राजदूत ने बताया कि पिछले साल 23 अप्रैल को सिंधु जल समझौते को स्थगित करने का निर्णय अचानक नहीं था, बल्कि यह पाकिस्तान के कुकृत्यों का परिणाम था। यह निर्णय पहलगाम में हुए एक भयानक आतंकवादी हमले के एक दिन बाद लिया गया था, जिसमें पाकिस्तान समर्थित आतंकियों ने 26 निर्दोष लोगों की जान ले ली थी। क्वात्रा ने याद दिलाया कि 1960 में हुआ यह समझौता असमान था, जिसमें भारत को केवल 20 प्रतिशत पानी मिला जबकि पाकिस्तान ने 80 प्रतिशत पर नियंत्रण रखा। इस असमानता ने भारतीय क्षेत्रों के विकास को बाधित किया, फिर भी भारत ने समझौते का पालन किया। इसके बदले में, पाकिस्तान ने 1965, 1971 और 1999 में युद्ध किए और कई आतंकवादी हमले किए।
पाकिस्तान की चालाकी और भारत का दृढ़ रुख
विनय मोहन क्वात्रा ने पाकिस्तान की उस चालाकी को भी उजागर किया, जिसके तहत उसने भारत की हर पनबिजली परियोजना और विकास कार्य में बाधा डाली। जब भी भारत ने इस छह दशक पुराने समझौते की शर्तों पर पुनर्विचार करने का प्रयास किया, पाकिस्तान ने हमेशा इसे खारिज किया। राजदूत ने कहा कि पाकिस्तान ने धीरे-धीरे उस विश्वास को समाप्त कर दिया, जिस पर यह संधि आधारित थी। उन्होंने उन लोगों को भी चेतावनी दी जो अभी भी दोनों देशों के बीच वार्ता की वकालत करते हैं। उनका मानना है कि इतिहास से सबक लिए बिना बार-बार एक ही नाकाम कोशिश करना समझदारी नहीं है।
आतंकवाद और बातचीत का असंभव मेल
राजदूत ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के शब्दों को दोहराते हुए भारत का वर्तमान रुख स्पष्ट किया। उन्होंने कहा कि आतंकवाद और बातचीत कभी एक साथ नहीं चल सकते और न ही पानी और खून एक साथ बह सकते हैं। पाकिस्तान में जल संकट पर टिप्पणी करते हुए क्वात्रा ने कहा कि यह भारत का नहीं, बल्कि इस्लामाबाद की सरकार के कुप्रबंधन का परिणाम है। उन्होंने पाकिस्तान को सलाह दी कि वह भारत के खिलाफ सम्मेलन आयोजित करने और खोखली धमकियां देने के बजाय अपनी जल बर्बादी और स्थिति को सुधारने पर ध्यान दे। पाकिस्तान की हर घरेलू विफलता का दोष भारत पर डालने की आदत अब पुरानी हो चुकी है और पूरी दुनिया को इसके खिलाफ आवाज उठानी चाहिए।
