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भारत ने मानवाधिकारों के लिए राजनीतिकरण से बचने का किया आग्रह

भारत ने संयुक्त राष्ट्र में मानवाधिकारों के लिए राजनीतिकरण से बचने का आग्रह किया है। स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने कहा कि देश सभी के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। उन्होंने सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करने की आवश्यकता पर जोर दिया। भारत ने हाल ही में विरोध प्रदर्शनों पर उच्चायुक्त कार्यालय की टिप्पणियों को अस्वीकार्य बताया। इस लेख में भारत के मानवाधिकार दृष्टिकोण और हाल की घटनाओं पर चर्चा की गई है।
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संयुक्त राष्ट्र में भारत का मानवाधिकारों पर बयान

(योषिता सिंह) भारत ने संयुक्त राष्ट्र के मानवाधिकार निकायों से अनुरोध किया है कि वे राजनीतिकरण से बचें और सांस्कृतिक तथा ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करें। भारत ने यह भी कहा है कि वह सभी के मानवाधिकारों को बिना किसी भेदभाव के बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध है। संयुक्त राष्ट्र में भारत के स्थायी मिशन के प्रथम सचिव अनुज स्वरूप ने सोमवार को महासभा की तीसरी समिति के 81वें सत्र में 'मानवाधिकार परिषद की रिपोर्ट' पर भारत का दृष्टिकोण प्रस्तुत किया।


स्वरूप ने कहा, 'हम सभी के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने के लिए प्रतिबद्ध हैं, बिना किसी भेदभाव के।' उन्होंने उम्मीद जताई कि मानवाधिकार निकाय सांस्कृतिक और ऐतिहासिक संदर्भों का सम्मान करेंगे ताकि वे निष्पक्ष रूप से नैतिक मार्गदर्शन कर सकें।


यह टिप्पणी उस समय आई है जब भारत ने हाल ही में राष्ट्रीय राजधानी में विरोध प्रदर्शनों पर संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार उच्चायुक्त कार्यालय की टिप्पणियों को 'अनावश्यक' और देश के आंतरिक मामलों में 'अस्वीकार्य हस्तक्षेप' बताया था। उच्चायुक्त कार्यालय ने दिल्ली में विरोध प्रदर्शनों के दौरान प्रदर्शनकारियों की हिरासत पर चिंता व्यक्त की थी।


स्वरूप ने बताया कि भारत का मानवाधिकारों के प्रति दृष्टिकोण बहुलवाद और शांतिपूर्ण सह-अस्तित्व पर आधारित है। उन्होंने कहा, 'मानवाधिकार परिषद के सदस्य के रूप में, भारत संवाद और सहयोग की भावना से रचनात्मक भूमिका निभा रहा है।'


भारत ने पिछले एक दशक में 25 करोड़ से अधिक लोगों को बहुआयामी गरीबी से बाहर निकाला है और 100 करोड़ से अधिक लोगों को सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ मिल रहा है। उन्होंने कहा कि 80 करोड़ लोगों को मुफ्त खाद्यान्न और 60 करोड़ लोगों को स्वास्थ्य बीमा मिल रहा है।


स्वरूप ने कहा, 'भारत सभी के मानवाधिकारों को बढ़ावा देने और उनकी रक्षा करने के लिए प्रतिबद्ध है।' उन्होंने मानवाधिकार परिषद को एक प्रभावी और निष्पक्ष निकाय बनाने के लिए सभी सदस्य देशों के साथ मिलकर काम करने की बात कही।


संयुक्त राष्ट्र महासभा ने हाल ही में कई देशों को मानवाधिकार परिषद का सदस्य चुना। भारत ने मूल निवासियों के अधिकारों पर एक रिपोर्ट में किए गए उल्लेख पर भी आपत्ति जताई।


स्वरूप ने कहा कि रिपोर्ट में भारत के बारे में बिना ठोस आधार के किए गए उल्लेख पर कड़ी आपत्ति है। उन्होंने कहा कि वन अधिकार अधिनियम के तहत 54 लाख से अधिक दावे दाखिल किए गए हैं, जिनमें से 80 प्रतिशत का निपटारा किया जा चुका है।


उन्होंने कहा कि भारत ने विशेष प्रतिवेदक को अद्यतन आंकड़े उपलब्ध कराने की पेशकश की है ताकि रिपोर्ट में आई गलतियों को सुधारा जा सके।