भारत ने यूक्रेन में रूसी तेल पर पश्चिमी देशों को दिया स्पष्ट संदेश
भारत का स्पष्ट जवाब
पश्चिमी देशों द्वारा भारत पर रूसी तेल की खरीद को लेकर लगातार दबाव बनाया जा रहा है। इस पर भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने यूक्रेन की धरती से एक स्पष्ट जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि यदि भारत रूस से तेल खरीदना भी कम कर दे, तो इससे यूक्रेन में चल रही जंग पर कोई असर नहीं पड़ेगा। जयशंकर अपने आधिकारिक दौरे पर कीव पहुंचे थे, जहां उन्होंने इस मुद्दे पर पश्चिमी देशों को दो टूक जवाब दिया।
उन्होंने यह भी कहा कि पश्चिमी देशों की यह धारणा गलत है कि रूस की कमाई को रोकने से वह युद्ध समाप्त करने पर मजबूर हो जाएगा।
यूक्रेन के विदेश मंत्री से बातचीत
यूक्रेन के विदेश मंत्री से मुलाकात के बाद, एस जयशंकर ने कहा कि यह युद्ध अब पांचवें वर्ष में प्रवेश कर चुका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह संघर्ष केवल बातचीत और कूटनीति के माध्यम से ही समाप्त होगा, न कि तेल या अन्य संसाधनों की खरीद पर निर्भर होकर।
जयशंकर ने भारत की ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने में आने वाली चुनौतियों पर भी चर्चा की। उन्होंने कहा कि 1.4 अरब लोगों की ऊर्जा जरूरतों को पूरा करना आसान नहीं है। उन्होंने यह भी बताया कि इस समय जब वैश्विक ऊर्जा स्थिति कठिन है, तब भारत और यूक्रेन दोनों के दृष्टिकोण का सम्मान किया जाना चाहिए।
अमेरिका का दबाव
जयशंकर ने यह भी बताया कि यदि अमेरिका उन देशों पर प्रतिबंध लगाने का कानून पास करता है जो रूस से ऊर्जा खरीदना जारी रखते हैं, तो क्या भारत अपनी खरीद कम करेगा। उन्होंने कहा कि अमेरिका और ब्रिटेन जैसे पश्चिमी देश इस दलील का समर्थन करते हैं कि रूस के ऊर्जा कारोबार को रोकने से उसकी कमाई घटेगी, जिससे युद्ध के लिए फंडिंग में कमी आएगी।
पिछले महीने, अमेरिकी सेनेट ने एक बिल पास किया था, जो राष्ट्रपति को उन देशों पर 100% तक का टैरिफ लगाने का अधिकार दे सकता है, जो रूस से तेल और गैस का आयात जारी रखते हैं।
भारत और रूस के व्यापार आंकड़े
अमेरिका के दबाव के बावजूद, रूस भारत के कच्चे तेल का सबसे बड़ा सप्लायर बना हुआ है, हालांकि अगस्त में इसके आयात में गिरावट देखी गई है।
