भारत ने समुद्री सुरक्षा के लिए नई पहल की घोषणा की
समुद्री हमलों पर भारत की कड़ी प्रतिक्रिया
(योषिता सिंह) संयुक्त राष्ट्र, 25 सितंबर: भारत ने शुक्रवार को स्पष्ट किया कि नाविकों पर होने वाले लगातार हमले ‘‘अस्वीकार्य’’ हैं और इन्हें ‘‘किसी भी तरह से सही नहीं ठहराया जा सकता’’। इन हमलों के कारण निर्दोष लोगों की जानें जाती हैं और समुद्री व्यापार में रुकावट आती है। इस संदर्भ में, भारत ने लाइबेरिया के साथ मिलकर नाविकों और जहाजरानी की सुरक्षा पर एक महत्वपूर्ण समुद्री पहल की शुरुआत की। विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा, ‘‘काला सागर से लेकर लाल सागर और खाड़ी क्षेत्र तक, असैन्य जहाजों पर हमले चिंता का विषय बन गए हैं।’’
नाविकों की सुरक्षा के लिए मित्र समूह का गठन
जयशंकर ने लाइबेरिया की विदेश मंत्री सारा बेसोलो न्यांती के साथ संयुक्त राष्ट्र महासभा के उच्चस्तरीय सत्र के दौरान ‘जहाजरानी और नाविकों की सुरक्षा के लिए मित्र समूह’ की स्थापना की। भारत और लाइबेरिया इस समूह के सह-अध्यक्ष के रूप में कार्य करेंगे, जो समुद्री व्यापार, सुरक्षा और संरक्षा से संबंधित विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित करेगा। उन्होंने कहा कि इस पहल का उद्देश्य सभी संबंधित पक्षों को एकत्रित करना है।
हाल के हमलों का जिक्र
जयशंकर ने समुद्री जहाजों और नाविकों पर हाल में हुए हमलों का उल्लेख किया, जिनमें भारतीय समुद्री कर्मियों की जान गई और कई कंटेनरों को नुकसान पहुंचा। उन्होंने बताया कि ओमान की खाड़ी में एंटीगुआ और बारबुडा के झंडे वाले एक बल्क कैरियर ‘एमवी केप डाओ’ पर हाल ही में हमला हुआ, जिसमें एक भारतीय नाविक की मृत्यु हो गई। इससे पहले, पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर ‘अल गाईया’ को होर्मुज जलडमरूमध्य में निशाना बनाया गया था।
नाविकों की सुरक्षा पर चिंता
जयशंकर ने कहा, ‘‘दुर्भाग्यवश, ये अब असाधारण घटनाएं नहीं रह गई हैं। पिछले कुछ महीनों में खाड़ी, लाल सागर और इसके आसपास के क्षेत्रों में वाणिज्यिक जहाजरानी पर बार-बार हमले हुए हैं।’’ उन्होंने यह भी बताया कि हाल के वैश्विक घटनाक्रम नाविकों की सुरक्षा के सामने मौजूद खतरों को उजागर करते हैं, जैसे कि जहाज पर लंबे समय तक फंसे रहना और चालक दल के सदस्यों की अदला-बदली में देरी।
अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता
उन्होंने कहा, “हालांकि नाविकों के अधिकारों की सुरक्षा के लिए अंतरराष्ट्रीय और क्षेत्रीय व्यवस्थाएं मौजूद हैं, लेकिन इस मामले में और मजबूत तथा करीबी अंतरराष्ट्रीय सहयोग की आवश्यकता है।” जयशंकर ने याद किया कि हाल ही में नई दिल्ली में हुए ब्रिक्स नेताओं के शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नाविकों के लिए आपातकालीन सहायता नेटवर्क स्थापित करने का प्रस्ताव रखा था।
हमलों की रोकथाम की आवश्यकता
जयशंकर ने कहा कि हाल के महीनों में दुनिया ने वाणिज्यिक जहाजरानी पर ‘‘अस्वीकार्य हमले’’ देखे हैं। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा मानना है कि ऐसी हिंसा और लोगों की जान जाने को किसी भी तरह उचित नहीं ठहराया जा सकता। सीधे शब्दों में कहें तो, इन हमलों को रोकना ही होगा।’’
