भारत-पाकिस्तान के बीच बातचीत की अपील पर राजनीतिक विवाद
राजनयिक संबंधों की बहाली की मांग
भारत और पाकिस्तान के बीच सीमा पार आतंकवाद के मुद्दे पर बढ़ते तनाव के बावजूद, कई प्रमुख भारतीय नेताओं और प्रसिद्ध हस्तियों ने एक खुले पत्र पर हस्ताक्षर किए हैं, जिसमें दोनों देशों के बीच बातचीत फिर से शुरू करने और राजनयिक संबंधों को बहाल करने की अपील की गई है। इस पत्र में हस्ताक्षर करने वालों में नेशनल कॉन्फ्रेंस के अध्यक्ष फारूक अब्दुल्ला, PDP प्रमुख महबूबा मुफ्ती, RJD सांसद प्रो. मनोज झा, अलगाववादी नेता मीरवाइज उमर फारूक, RAW के पूर्व प्रमुख ए.एस. दुलत, मणिशंकर अय्यर, हुमायूं कबीर, जवाहर सरकार, मोहम्मद यूसुफ तारिगामी और अन्य शामिल हैं। यह अपील 'सेंटर फॉर पीस एंड प्रोग्रेस' द्वारा प्रधानमंत्री मोदी और पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ को संबोधित की गई थी।
पत्र में प्रमुख मांगें
इस पत्र में 30 जून को दोनों सरकारों से दक्षिण एशिया में शांति, बातचीत, सामान्य स्थिति और सहयोग बहाल करने के लिए 'अर्थपूर्ण और लगातार कदम' उठाने का अनुरोध किया गया है। हस्ताक्षरकर्ताओं का कहना है कि भारत और पाकिस्तान के बीच लगातार दुश्मनी के कारण लाखों युवा अवसरों, खुशहाली और सुरक्षित भविष्य से वंचित हो रहे हैं। पत्र में यह भी कहा गया है कि इस क्षेत्र में लगभग एक-पांचवीं वैश्विक आबादी निवास करती है और इसका भविष्य शांति, विकास, कनेक्टिविटी और सहयोग के माध्यम से तय होना चाहिए।
बीजेपी का पलटवार
बीजेपी ने हस्ताक्षरकर्ताओं पर तीखा हमला करते हुए उन्हें 'आतंकवाद का समर्थक' करार दिया है। पार्टी के प्रवक्ता शहज़ाद पूनावाला ने आरोप लगाया कि ये नेता बार-बार पाकिस्तान के साथ बातचीत की वकालत कर रहे हैं, जबकि इस्लामाबाद सीमा पार आतंकवाद को बढ़ावा दे रहा है। उन्होंने कहा कि भारत ने आतंकवाद के खिलाफ सख्त नीति अपनाई है और यह अपील देश के शहीदों और सशस्त्र सेनाओं का अपमान है।
