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भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता कदम

भारत और फ्रांस के बीच रक्षा सहयोग को नई ऊंचाइयों पर ले जाने की तैयारी है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा से पहले, फ्रांस ने भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिए तकनीकी ट्रांसफर और स्वदेशी हथियारों के एकीकरण का आश्वासन दिया है। यह डील 'मेक इन इंडिया' पहल का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगी। जानें इस डील के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभावों के बारे में।
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भारत-फ्रांस रक्षा सहयोग में नई ऊंचाइयों की ओर बढ़ता कदम

भारत की मेक इन इंडिया पहल को मिलेगी नई ताकत

भारत की 'मेक इन इंडिया' योजना और भारत-फ्रांस के बीच रणनीतिक रक्षा सहयोग को एक महत्वपूर्ण मजबूती मिलने की संभावना है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की आगामी यात्रा से पहले, फ्रांस ने संकेत दिया है कि वह भारतीय वायुसेना के लिए 114 राफेल फाइटर जेट की खरीद के लिए पूरी तकनीकी ट्रांसफर और स्वदेशी हथियारों के एकीकरण के लिए तैयार है। फ्रांसीसी कूटनीतिक सूत्रों के अनुसार, फ्रांस अब भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल एक ग्राहक-आपूर्तिकर्ता के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक और तकनीकी सहयोगी के रूप में देखता है।


प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा

फ्रांसीसी सूत्रों ने बताया कि 'मेक इन इंडिया' इस डील का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। यह घटनाक्रम प्रधानमंत्री मोदी की फ्रांस यात्रा से पहले आया है, जिसमें रक्षा सहयोग मुख्य एजेंडा होगा। पीएम मोदी शनिवार से फ्रांस और स्लोवाकिया की एक सप्ताह की यात्रा पर जाएंगे, जहां वह G7 शिखर सम्मेलन में भाग लेंगे और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रॉन के साथ द्विपक्षीय वार्ता करेंगे।


टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और स्वदेशी इंटीग्रेशन

रिपोर्टों के अनुसार, फ्रांस ने राफेल प्रोग्राम के लिए तकनीकी ट्रांसफर को स्वीकार किया है और यह भी कि राफेल जेट में भारतीय निर्मित हथियारों और मिसाइलों का एकीकरण समझौते का एक महत्वपूर्ण हिस्सा होगा। फ्रांस ने यह भी स्पष्ट किया है कि वह भारत के साथ अपने रक्षा संबंधों को केवल एक ग्राहक-आपूर्तिकर्ता के रिश्ते के रूप में नहीं, बल्कि एक दीर्घकालिक रणनीतिक साझेदारी के रूप में देखता है।


114 राफेल जेट की खरीद प्रक्रिया

114 नए राफेल जेट की खरीद प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। भारत ने फ्रांस को 114 राफेल फाइटर जेट खरीदने के लिए एक औपचारिक 'लेटर ऑफ रिक्वेस्ट' भेजा है, जो सरकार-से-सरकार रक्षा खरीद प्रक्रिया की शुरुआत के लिए आवश्यक है। ये नए विमान भारतीय वायु सेना के लिए हैं और 'मेक इन इंडिया' पहल के तहत डसॉल्ट एविएशन और एक भारतीय कंपनी के बीच साझेदारी के माध्यम से भारत में निर्मित किए जाने का प्रस्ताव है।


भारत की शर्तें

भारत ने इस डील के लिए कुछ ऐसी शर्तें रखी हैं जिन पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता, जिनमें स्वदेशी हथियार, भारतीय डेटा लिंक सिस्टम और डिजिटल नेटवर्किंग क्षमताएं शामिल हैं। प्रस्तावित समझौते में इंजन, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स से जुड़ी तकनीकी ट्रांसफर भी शामिल होने की उम्मीद है।


AI क्षमताओं वाले एडवांस्ड राफेल वेरिएंट

भारतीय वायु सेना वर्तमान में 2015 की डील के तहत प्राप्त 36 राफेल जेट के F3R वर्शन का उपयोग कर रही है। डसॉल्ट ने इसके बाद F4 स्टैंडर्ड विकसित किया है, जबकि अगली पीढ़ी का F5 वेरिएंट अभी निर्माणाधीन है। भारत नई डील में F-4 और आने वाले F-5 वेरिएंट का मिश्रण चाहता है। इन नए वेरिएंट में अत्याधुनिक AESA रडार, बेहतर इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर क्षमताएं, एडवांस्ड सेल्फ-प्रोटेक्शन सिस्टम, लंबी दूरी की मिसाइलें और बेहतर सैटेलाइट कम्युनिकेशन सुविधाएं होंगी।


स्वदेशी कंटेंट का प्रतिशत

इस प्रोग्राम में 55-60 प्रतिशत स्वदेशी कंटेंट हासिल होने की उम्मीद है, जिसमें डसॉल्ट एविएशन, इंजन निर्माता सैफरन और एवियोनिक्स कंपनी थेल्स तकनीकी ट्रांसफर में शामिल हैं। एक बार जब भारत में एयरफ्रेम, इंजन और एवियोनिक्स के लिए मैन्युफैक्चरिंग तकनीक स्थापित हो जाएगी, तो प्रोजेक्ट में स्वदेशी कंटेंट 55 से 60 प्रतिशत तक पहुंचने की उम्मीद है।


अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर सुविधाएं

अंबाला एयर फोर्स स्टेशन पर राफेल के लिए प्रशिक्षण, रखरखाव, मरम्मत और ओवरहॉल (MRO) सुविधाएं पहले से ही चालू हैं। भारतीय वायु सेना के पास आवश्यक इंफ्रास्ट्रक्चर, स्पेयर पार्ट्स और प्रशिक्षित कर्मचारी हैं ताकि तुरंत दो अतिरिक्त स्क्वाड्रन को ऑपरेशनल सर्विस में शामिल किया जा सके।