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भारत-बांग्लादेश के रिश्तों में नई हलचल, शेख हसीना के बयान पर विवाद

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक रिश्तों में हाल ही में हलचल देखने को मिली है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की प्रस्तावित भारत यात्रा को लेकर बातचीत चल रही है, लेकिन पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना के बयान ने विवाद को जन्म दिया है। बांग्लादेश ने इस पर कड़ा ऐतराज जताते हुए भारत से शेख हसीना को वापस सौंपने की मांग की है। भारत ने इस मामले में अपनी स्थिति स्पष्ट की है। दोनों देश अपने रिश्तों को सुधारने की कोशिश कर रहे हैं, जबकि बांग्लादेश ने अपनी विदेश नीति को 'बांग्लादेश फर्स्ट' के सिद्धांत पर आधारित रखने की बात कही है।
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भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक गतिविधियाँ

भारत और बांग्लादेश के बीच कूटनीतिक संबंधों में एक बार फिर से हलचल देखने को मिल रही है। बांग्लादेश के प्रधानमंत्री तारिक रहमान की भारत यात्रा को लेकर दोनों देशों के अधिकारियों के बीच कई हफ्तों से चर्चा चल रही है। हालांकि, बांग्लादेश के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता शाहिदुल करीम ने स्पष्ट किया है कि इस प्रस्तावित दौरे की तारीखें अभी तक तय नहीं हुई हैं.


शेख हसीना के बयान पर बांग्लादेश का ऐतराज

इस बातचीत के दौरान तनाव उस समय बढ़ गया जब बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना ने नई दिल्ली में एक प्रेस कॉन्फ्रेंस की। ढाका ने इस पर कड़ा ऐतराज जताया है। बांग्लादेश सरकार का कहना है कि अंतरराष्ट्रीय अपराध ट्रिब्यूनल से दोषी ठहराई गईं शेख हसीना को भारत में सार्वजनिक मंच पर बोलने का अवसर नहीं मिलना चाहिए था। इसके साथ ही, बांग्लादेश ने भारत से शेख हसीना और अन्य आरोपियों को वापस सौंपने की मांग दोहराई है.


भारत की प्रतिक्रिया

बांग्लादेश के ऐतराज पर भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। भारतीय विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल ने कहा कि शेख हसीना का कार्यक्रम एक निजी मीडिया क्लब द्वारा आयोजित किया गया था। इस इवेंट में भारत सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और न ही सरकार वहां कही गई बातों का समर्थन करती है.


तनाव के बीच रिश्तों को सुधारने की कोशिश

इस बयानबाजी के बावजूद, दोनों देश अपने रिश्तों को बनाए रखने की कोशिश कर रहे हैं। हाल ही में, बांग्लादेश में भारत के उच्चायुक्त दिनेश त्रिवेदी ने पीएम तारिक रहमान से मुलाकात की और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का संदेश उन तक पहुँचाया। दोनों पक्ष आम लोगों से जुड़े मुद्दों पर मिलकर आगे बढ़ने की बात कर रहे हैं। वहीं, बांग्लादेश ने फिर से स्पष्ट किया है कि उसकी विदेश नीति हमेशा 'बांग्लादेश फर्स्ट' के सिद्धांत पर आधारित होगी.