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भारत में मांसाहार की बढ़ती प्रवृत्ति: आंकड़े और विश्लेषण

धीरेंद्र शास्त्री के मांसाहार पर बयान के बाद, भारत में भोजन की प्राथमिकताओं पर चर्चा तेज हो गई है। आधिकारिक आंकड़े बताते हैं कि 78% हिंदू मांसाहार करते हैं, जबकि अन्य समुदायों में यह प्रतिशत और भी अधिक है। विभिन्न राज्यों में खानपान की आदतें भिन्न हैं, दक्षिण और पूर्वी भारत में मांसाहार का प्रचलन अधिक है। पिछले दो दशकों में मांसाहार करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है, जो बदलती जीवनशैली को दर्शाता है। इस लेख में हम इन आंकड़ों और प्रवृत्तियों का विश्लेषण करेंगे।
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मांसाहार पर बढ़ती चर्चा


कथावाचक धीरेंद्र शास्त्री के नवरात्रि के दौरान मांसाहार से दूर रहने के बयान ने देश में भोजन की आदतों पर बहस को जन्म दिया है। भारत को अक्सर शाकाहारी देश माना जाता है, लेकिन आधिकारिक आंकड़े एक अलग कहानी बयां करते हैं। नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (NFHS-5) और सरकारी आंकड़ों से यह स्पष्ट होता है कि हिंदू समुदाय का एक बड़ा हिस्सा नियमित या कभी-कभी मांसाहार का सेवन करता है।


हिंदू आबादी में मांसाहार का प्रतिशत

NFHS-5 की रिपोर्ट के अनुसार, भारत में लगभग 78% हिंदू (लगभग 65 करोड़ लोग) किसी न किसी रूप में मांसाहार करते हैं। अन्य धार्मिक समुदायों में, लगभग 98% मुस्लिम और 98% ईसाई मांसाहारी हैं, जबकि जैन समुदाय में यह आंकड़ा लगभग 15% है। ये आंकड़े दर्शाते हैं कि भोजन का चयन धार्मिक मान्यताओं के अलावा क्षेत्रीय संस्कृति और भूगोल पर भी निर्भर करता है।


राज्यों के अनुसार खानपान की विविधता

दक्षिण और पूर्वी भारत में मांसाहार का प्रचलन अधिक है, जबकि उत्तर और पश्चिमी भारत में शाकाहार का प्रभाव अधिक है।


पूर्वी और दक्षिण भारत: तेलंगाना (99%), पश्चिम बंगाल (98%), ओडिशा (98%), केरल (97%), तमिलनाडु (97%) और आंध्र प्रदेश (96%) में अधिकांश लोग नॉनवेज का सेवन करते हैं। पूर्वोत्तर राज्यों में भी यह आंकड़ा 95% से 98% के बीच है।


उत्तर और पश्चिम भारत: राजस्थान में सबसे कम (लगभग 25%) लोग नॉनवेज खाते हैं। हरियाणा (30%), पंजाब (35%), गुजरात (40%) और उत्तर प्रदेश (55%-65%) में शाकाहार का प्रभाव अधिक है।


मांस उत्पादन और खपत

पशुपालन विभाग के अनुसार, वर्ष 2024-25 में भारत में प्रति व्यक्ति मांस की उपलब्धता 7.51 किलोग्राम (लगभग 20.6 ग्राम प्रतिदिन) रहने की संभावना है। भारत वैश्विक स्तर पर मांस उत्पादन में चौथे स्थान पर है। देश का कुल मांस उत्पादन 2014-15 में 6.69 मिलियन टन से बढ़कर 2024-25 में 10.50 मिलियन टन तक पहुंच गया है। पश्चिम बंगाल (12.46%) और उत्तर प्रदेश (12.20%) इस उत्पादन में सबसे आगे हैं।


पिछले दो दशकों में मांसाहार का बढ़ता चलन

पिछले 20 वर्षों में मांसाहार करने वालों की संख्या में वृद्धि हुई है। आंकड़ों के अनुसार, 2006 में 80% पुरुष मांसाहारी थे, जो 2021 तक बढ़कर 87% हो गए। महिलाओं में भी यह अनुपात 2006 के 71% से बढ़कर 2021 में 75% तक पहुंच गया है, जो बदलती जीवनशैली को दर्शाता है।