भारत-यूके व्यापार समझौता: नई संभावनाओं की शुरुआत
भारत-यूके सीईटीए का महत्व
लंदन/नई दिल्ली: केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने 15 जुलाई से लागू होने वाले भारत-यूके कॉम्प्रिहेंसिव इकोनॉमिक एंड ट्रेड एग्रीमेंट (सीईटीए) के संदर्भ में भारतीय समुदाय के साथ एक बैठक की। उन्होंने इस द्विपक्षीय व्यापार समझौते के लाभों के बारे में जानकारी दी और बताया कि यह दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश और नवाचार में सहयोग को मजबूत करेगा।
प्रवासी समुदाय की भूमिका
गोयल ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म 'एक्स' पर साझा किया कि बैठक में प्रवासी समुदाय की महत्वपूर्ण भूमिका पर चर्चा की गई, जो आर्थिक, सांस्कृतिक और आपसी संबंधों को मजबूत करने में सहायक है।
सीए समुदाय का योगदान
उन्होंने आईसीएआई यूके चैप्टर के सदस्यों से भी बातचीत की और भारत-यूके के आर्थिक संबंधों को मजबूत करने में चार्टर्ड एकाउंटेंट्स की भूमिका पर जोर दिया।
नए अवसरों की खोज
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि भारत-यूके सीईटीए पेशेवरों के लिए नए अवसर खोलेगा। उन्होंने सभी पेशेवरों से आग्रह किया कि वे इस समझौते से मिलने वाले अवसरों का अधिकतम लाभ उठाएं और दोनों देशों की प्रगति में योगदान दें।
शोध और नवाचार पर चर्चा
गोयल ने यूनिवर्सिटी ऑफ वारविक के प्रोफेसर सिद्धार्थ खस्तगीर के साथ उद्योग और अकादमिक सहयोग को बढ़ाने और अनुसंधान आधारित नवाचार को आगे बढ़ाने पर भी महत्वपूर्ण चर्चा की।
शिक्षा और कौशल विकास
जीईडीयू ग्लोबल एजुकेशन के ग्रुप सीईओ डॉ. विश्वजीत राणा के साथ बैठक में, गोयल ने उच्च शिक्षा, कौशल और नवाचार के क्षेत्र में भारत-यूके सहयोग को और मजबूत करने के उपायों पर चर्चा की।
व्यापार संबंधों को मजबूत करने की अपील
गोयल ने भारतीय कंपनियों से आग्रह किया कि वे यूके की कंपनियों के साथ अपने संबंधों को मजबूत करें और भारत-यूके सीईटीए के तहत मिलने वाले अवसरों को व्यापार वृद्धि में बदलें।
महत्वपूर्ण व्यापार समझौता
लंदन में 'भारत-यूके: पार्टनर्स इन प्रोग्रेस बिजनेस प्लेनरी' को संबोधित करते हुए गोयल ने कहा कि यह महत्वपूर्ण व्यापार समझौता दोनों देशों के बीच व्यापार, निवेश, प्रौद्योगिकी साझेदारी, नवाचार और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला को बढ़ावा देने के लिए बड़े अवसर प्रदान करता है।
