भारत-रूस संबंधों में सांस्कृतिक कूटनीति का नया अध्याय
प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति पुतिन की महत्वपूर्ण मुलाकात
नई दिल्ली: दिल्ली में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच हुई मुलाकात ने भारत-रूस संबंधों के साथ-साथ सांस्कृतिक कूटनीति पर भी ध्यान केंद्रित किया। द्विपक्षीय वार्ता के बाद, दोनों नेता एक साथ भारत मंडपम पहुंचे, जहां मोदी ने पुतिन को तिरुवल्लुवर की प्रसिद्ध कृति तिरुक्कुरल का रूसी अनुवाद भेंट किया। इसके साथ ही, व्यापार और औद्योगिक सहयोग को बढ़ावा देने पर भी चर्चा हुई। पुतिन बाद में ब्रिक्स बिजनेस फोरम को संबोधित करेंगे।
तिरुक्कुरल का सांस्कृतिक महत्व
प्रधानमंत्री मोदी ने पुतिन को तिरुक्कुरल का रूसी संस्करण देते हुए कहा कि यह रचना लगभग दो हजार साल पहले तिरुवल्लुवर द्वारा मानव जीवन के विभिन्न पहलुओं को समेटती है। उनका मानना है कि इसका रूसी अनुवाद दोनों देशों के बीच संपर्क को और मजबूत करेगा। मोदी ने इसे भारत-रूस संबंधों को गहरा करने का एक सांस्कृतिक माध्यम बताया। तिरुक्कुरल में कुल 1330 दोहे शामिल हैं।
मोदी और पुतिन का एक साथ यात्रा
द्विपक्षीय बैठक के बाद, मोदी और पुतिन एक ही कार में भारत मंडपम स्थित इनोप्रोम प्रदर्शनी के लिए रवाना हुए। यह दौरा केवल ब्रिक्स बैठक तक सीमित नहीं है, बल्कि दोनों देशों के बीच आर्थिक और औद्योगिक संबंधों को आगे बढ़ाने पर भी चर्चा हुई। पुतिन इसी दिन ब्रिक्स बिजनेस फोरम में भी भाग लेंगे, जहां कारोबारी सहयोग से जुड़े मुद्दों पर चर्चा होने की उम्मीद है।
व्यापार और औद्योगिक सहयोग पर जोर
सूत्रों के अनुसार, मोदी और पुतिन की बातचीत में व्यापार को नए स्तर पर ले जाने का लक्ष्य भी शामिल था। इनोप्रोम प्रदर्शनी को भारत-रूस औद्योगिक सहयोग के लिए एक महत्वपूर्ण मंच माना जा रहा है। भारत में इसके आयोजन से विनिर्माण, भारी उद्योग, सुरंग निर्माण और आपूर्ति श्रृंखला जैसे क्षेत्रों में साझेदारी बढ़ाने की संभावनाएं बनी हैं। इससे रूसी कंपनियों के लिए भारतीय बाजार में प्रवेश करना भी आसान हो सकता है।
इनोप्रोम प्रदर्शनी का महत्व
इनोप्रोम एक अंतरराष्ट्रीय औद्योगिक प्रदर्शनी है, जहां विभिन्न देशों के निर्माता और खरीदार नई तकनीक और औद्योगिक समाधान प्रस्तुत करते हैं। यह कंपनियों को नए बाजारों में प्रवेश करने और कारोबारी साझेदारी खोजने का अवसर प्रदान करती है। भारत में इसका आयोजन रूस के साथ औद्योगिक संबंधों को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। इससे तकनीक, उत्पादन और निवेश से जुड़े सहयोग के नए रास्ते खुल सकते हैं।
भारत की ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेजबानी
भारत नई दिल्ली में 18वें ब्रिक्स शिखर सम्मेलन की मेज़बानी कर रहा है। इस समूह में ब्राजील, रूस, भारत, चीन, मिस्र, इथियोपिया, इंडोनेशिया, ईरान, सऊदी अरब, दक्षिण अफ्रीका और संयुक्त अरब अमीरात शामिल हैं। ब्रिक्स वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच आर्थिक, राजनीतिक, तकनीकी और जनसंपर्क को बढ़ावा देने का मंच बन चुका है। भारत की अध्यक्षता में इस बार लचीलापन, नवाचार, सहयोग और सतत विकास जैसे मुद्दों पर जोर दिया जा रहा है।
