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भारत सरकार ने मेटा पर कसा शिकंजा: डीपफेक और प्रोपेगैंडा से निपटने की मांग

भारत के इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय ने मेटा पर सख्त कदम उठाते हुए कंपनी से अपने एल्गोरिदम में बदलाव करने और डीपफेक तथा प्रोपेगैंडा से निपटने के लिए एक रोडमैप प्रस्तुत करने की मांग की है। इस बैठक में मेटा ने अपनी तकनीकी कमियों को स्वीकार किया और अगले हफ्ते एक और बैठक में विस्तृत योजना देने का वादा किया। जानें सरकार की मुख्य मांगें और क्यों बढ़ी है सख्ती।
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नई दिल्ली में मेटा के खिलाफ सख्त कदम


नई दिल्ली: इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय (MeitY) ने मेटा पर सख्त कार्रवाई की है। मंत्रालय ने कंपनी को निर्देश दिया है कि वह अपने प्लेटफॉर्म के एल्गोरिदम में आवश्यक परिवर्तन करे और डीपफेक, प्रोपेगैंडा तथा अन्य अवैध सामग्री से निपटने के लिए एक विस्तृत योजना प्रस्तुत करे।


मेटा से सरकार की प्रमुख मांगें

MeitY ने मेटा के साथ शुक्रवार को एक महत्वपूर्ण बैठक की। इस बैठक में अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सोशल मीडिया पर बढ़ते AI-जनित और मॉर्फ्ड सामग्री को रोकने के लिए ठोस कदम उठाने की आवश्यकता है।


सरकार ने मेटा से तीन मुख्य बातें मांगी हैं:



  1. कंटेंट मॉडरेशन को मजबूत करना - हानिकारक पोस्ट की पहचान और हटाने की प्रक्रिया को तेज करना।

  2. सरकारी एजेंसियों के टेकडाउन आदेशों का त्वरित पालन करना।

  3. डेटा लोकलाइजेशन - भारत के उपयोगकर्ताओं का डेटा देश के भीतर रखने के नियमों का पालन सुनिश्चित करना।


अधिकारियों ने विशेष रूप से कहा कि मेटा को अपने एल्गोरिदम में ऐसे बदलाव करने चाहिए जिससे डीपफेक और गलत जानकारी वाले पोस्ट का प्रसार अपने आप कम हो सके।


मेटा ने स्वीकार की कमियां, अगली बैठक की योजना

मेटा ने खामियों को माना: बैठक में मेटा की तकनीकी टीम ने बताया कि वे ऑनलाइन हानिकारक सामग्री को कैसे पहचानते और हटाते हैं। कंपनी ने अपने सिस्टम में कुछ कमियों को स्वीकार किया और बताया कि वे सिंथेटिक सामग्री से निपटने के लिए कौन से नए तकनीकी उपायों पर काम कर रहे हैं। सरकारी सूत्रों के अनुसार, दोनों पक्ष बातचीत जारी रखने पर सहमत हुए हैं। अगले हफ्ते एक और बैठक होगी जिसमें मेटा को अपना विस्तृत योजना प्रस्तुत करना है।


सख्ती का कारण

क्यों बढ़ी है सख्ती? यह निर्देश उस समय आया है जब भारत AI से बने नकली सामग्री के खिलाफ नियमों को और सख्त कर रहा है। MeitY के नए ढांचे के तहत बड़े सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि कोई भी सिंथेटिक जानकारी लेबल की जाए। साथ ही, उपयोगकर्ताओं से यह घोषणा ली जाए कि सामग्री AI द्वारा बनाई गई है या नहीं।


हाल के हफ्तों में, सरकार ने मेटा से एल्गोरिदम के कार्य करने के तरीके, उसमें पक्षपात और कानून-व्यवस्था बनाए रखने में भूमिका को लेकर भी सवाल उठाए हैं। सरकार का स्पष्ट रुख है कि प्लेटफॉर्म्स को हानिकारक सामग्री की पहचान पहले से करनी होगी, न कि शिकायत आने के बाद।


डीपफेक वीडियो और मॉर्फ्ड तस्वीरों के कारण चुनाव, सार्वजनिक व्यक्तियों और आम लोगों की छवि को नुकसान पहुंच रहा है। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्र अब सोशल मीडिया कंपनियों पर लगातार दबाव बना रहा है।