भारतीय-अमेरिकी महिला का चुनावी संघर्ष: नस्लवाद के खिलाफ खड़ी हुईं शुचिता पटेल
शुचिता पटेल का चुनावी अभियान
(विजय जोशी) कमिंग (अमेरिका), दो नवंबर को जॉर्जिया राज्य के एक समृद्ध क्षेत्र में एक भारतीय मूल की अमेरिकी महिला ने स्थानीय नेतृत्व के लिए एक अप्रत्याशित चुनाव में अपनी किस्मत आजमाने का निर्णय लिया है। यह वही क्षेत्र है जहां कभी कू क्लक्स क्लान (केकेके) का वर्चस्व था और नस्लवाद आम जीवन का हिस्सा था। भारतीय-अमेरिकी शुचिता पटेल अपने रिपब्लिकन प्रतिद्वंद्वी की धमकियों का सामना करने के लिए चुनाव लड़ रही हैं, ताकि बच्चों के लिए एक बेहतर भविष्य सुनिश्चित कर सकें। वह तीन नवंबर को फोर्सिथ काउंटी कमिश्नर के पद के लिए चुनाव में भाग ले रही हैं।
चुनाव की तैयारी
चुनाव में केवल दो दिन बचे हैं, और इस दौरान पटेल ने रविवार को मतदाताओं के घरों का दौरा किया, ताकि उन्हें याद दिला सकें कि वह चुनावी मैदान में हैं। पटेल फोर्सिथ काउंटी से चुनाव लड़ने वाली पहली भारतीय-अमेरिकी महिला हैं।
नस्ली हिंसा का इतिहास
इस काउंटी का नस्ली हिंसा का एक भयावह अतीत रहा है। 1912 में, श्वेत निवासियों और केकेके के सदस्यों ने लगभग पूरी अश्वेत आबादी को यहां से निकाल दिया था। इसके बाद, 20वीं सदी के अधिकांश समय तक यह क्षेत्र पूरी तरह से श्वेत आबादी वाला बना रहा।
परिवर्तन का संकेत
पटेल का चुनाव लड़ना इस बात का संकेत है कि पिछले कुछ दशकों में फोर्सिथ और अमेरिका में कितना बदलाव आया है। वह एक ऐसे प्रतिद्वंद्वी के खिलाफ चुनाव लड़ रही हैं, जो पिछले 16 वर्षों से निर्विरोध निर्वाचित होते आ रहे हैं। हालांकि, मध्यावधि चुनाव यह भी दर्शाते हैं कि अमेरिका राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रति कितना विभाजित है।
राजनीतिक माहौल
एक ओर ट्रंप के समर्थकों में अटूट निष्ठा है, वहीं दूसरी ओर उनके प्रति गहरी नफरत भी है। मध्यावधि चुनाव से अमेरिकी कांग्रेस की संरचना तय होगी, जिसमें प्रतिनिधि सभा की सभी 435 सीटों और 100 सदस्यीय सीनेट की 37 सीटों पर चुनाव होंगे।
स्थानीय चुनावों का महत्व
इन चुनावों के साथ कई राज्यों में गवर्नर, काउंटी कमिश्नर और स्कूल बोर्ड के प्रमुखों के लिए भी चुनाव होंगे। जनमत सर्वेक्षणों के अनुसार, ट्रंप की रिपब्लिकन पार्टी प्रतिनिधि सभा में अपना नियंत्रण खो सकती है।
पटेल का दृष्टिकोण
पटेल ने कहा, “मैं अपने ट्रांसजेंडर पड़ोसियों और समुदाय का समर्थन करती हूं। लेकिन अगर लोग राशन नहीं खरीद सकते, तो किसी को किसी की लैंगिक पहचान की परवाह नहीं है।” उन्होंने यह बात एक साक्षात्कार में कही।
समुदाय की स्थिति
फोर्सिथ काउंटी में अब भी मुख्य रूप से श्वेत आबादी है, जिसमें 2.8 लाख लोगों में लगभग 61 प्रतिशत श्वेत हैं। उल्लेखनीय है कि 2000 में महज 200 लोगों की आबादी वाला भारतीय समुदाय अब बढ़कर लगभग 48,000 हो गया है।
पटेल की उम्मीदें
पटेल को विश्वास है कि उनकी जीत की संभावना अच्छी है। उनका कहना है कि किसी भी पार्टी का उम्मीदवार निर्वाचित होने पर कमिश्नर का उद्देश्य एक ही रहता है। उन्होंने कहा कि मौजूदा कमिश्नर टॉड लेवेंट के प्रति लोगों में नाराजगी है।
राजनीति में कदम
पटेल ने स्वीकार किया कि उन्हें राजनीति का कोई अनुभव नहीं है, लेकिन किसी ने उन्हें चुनाव लड़ने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा, “मुझे लगा कि मैं अपनी दुनिया के एक छोटे से हिस्से में बदलाव ला सकती हूं।”
बेटी का सवाल
पटेल की सात साल की बेटी ने उनसे पूछा कि अगर चुनाव लड़ना इतना कठिन है, तो वह क्यों चुनावी मैदान में उतरी हैं। पटेल ने जवाब दिया, “मैं चाहती हूं कि यह समुदाय आप सभी के लिए और बेहतर बने।”
