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भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर संकट: होर्मुज जलडमरूमध्य में बढ़ते तनाव

खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के कारण भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है। 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' द्वारा जारी एक वीडियो में दिखाया गया है कि कैसे 22 अप्रैल को एक जहाज पर ईरान के IRGC की नावों का दबाव था। इस स्थिति ने भारतीय नाविकों को बार-बार खतरे में डाल दिया है। जानें इस संकट के मानवीय और आर्थिक प्रभावों के बारे में।
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भारतीय नाविकों की सुरक्षा पर गंभीर खतरा

खाड़ी और होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिका, इजरायल और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव के बीच भारतीय नाविकों की स्थिति चिंताजनक हो गई है। इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग पर व्यापारिक जहाजों को निशाना बनाए जाने से उनकी सुरक्षा को लेकर गंभीर संकट उत्पन्न हो गया है।


ईरान के साथ चल रहे तनाव के बीच, समुद्र में कार्यरत भारतीय नाविकों के लिए खतरा तब और बढ़ गया जब 'फॉरवर्ड सीमेन यूनियन ऑफ इंडिया' (FSUI) ने एक वीडियो जारी किया। इस वीडियो में 22 अप्रैल को होर्मुज जलडमरूमध्य में एक जहाज के साथ हुई "तनावपूर्ण झड़प" को दर्शाया गया है, जिसमें 22 क्रू सदस्यों में से 21 भारतीय थे।


IRGC की नौसेना बलों का दबाव

यूनियन ने 'X' पर एक पोस्ट में बताया कि जहाज पर ईरान के 'इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स' (IRGC) की नावों का दबाव था। FSUI के अनुसार, वीडियो में कई छोटी नावें जहाज को घेरे हुए दिख रही हैं, और क्रू सदस्य जहाज के अंदर छिपने का प्रयास कर रहे हैं।


यूनियन ने स्पष्ट किया, "ये समुद्री लुटेरे नहीं थे। ये IRGC की नौसेना बल थे।" उन्होंने कहा कि संघर्ष वाले क्षेत्रों में काम करने वाले आम नागरिकों की सुरक्षा के लिए केवल सलाह और सुरक्षा दिशानिर्देश पर्याप्त नहीं हैं।


भारतीय नाविकों की स्थिति

यह घटना समुद्री टकरावों की बढ़ती घटनाओं में से एक है, जो ईरान के खिलाफ अमेरिका-इजरायल युद्ध शुरू होने के बाद से हो रही हैं। भारतीय नाविक बार-बार इन खतरों का सामना कर रहे हैं।


22 अप्रैल को ईरान ने घोषणा की कि उसकी सेना ने होर्मुज जलडमरूमध्य में दो कमर्शियल जहाजों को कब्जे में ले लिया है। भारत के 'पत्तन, पोत परिवहन और जलमार्ग मंत्रालय' ने बताया कि ईरानी सेना द्वारा जिन तीन विदेशी झंडे वाले जहाजों पर गोलीबारी की गई थी, उनमें से दो पर 22 भारतीय नाविक सवार थे।


खतरे की निरंतरता

अप्रैल की घटनाओं के बाद भी खतरा बना रहा। जून में, होर्मुज जलडमरूमध्य में अमेरिकी सेना द्वारा भारतीय क्रू वाले कमर्शियल जहाजों पर हमले में तीन भारतीय नाविकों की मौत हो गई थी। इसके बाद भारत ने वाशिंगटन से जहाजों पर हमले रोकने का आग्रह किया।


जुलाई तक, रिपोर्टों से पता चला कि जलडमरूमध्य और उसके आसपास जहाजों पर अमेरिकी और ईरानी हमलों में मारे गए भारतीय नाविकों की संख्या बढ़कर आठ हो गई थी। संघर्ष शुरू होने के बाद से भारतीय नाविकों वाले कम से कम 10 नागरिक जहाजों को निशाना बनाया गया।


मानवीय संकट

समुद्री संकट ने इस महत्वपूर्ण समुद्री मार्ग से होने वाली शिपिंग को भी गंभीर रूप से प्रभावित किया है। हाल ही में एक शनिवार को केवल पांच कमोडिटी जहाज इस जलडमरूमध्य से गुजरे, जबकि अगले रविवार को कोई भी जहाज नहीं गुजरा।


इसका मानवीय असर भी काफी बड़ा रहा है; बताया गया है कि संघर्ष शुरू होने के बाद से 20,000 से अधिक नाविक खाड़ी क्षेत्र में फंसे हुए हैं। संकट में फंसे जहाजों पर मौजूद क्रू सदस्यों ने अपनी स्थिति को "जेल में होने" जैसा बताया है।


नाविकों की सुरक्षा पर चिंता

यह संकट भारत के लिए विशेष रूप से महत्वपूर्ण है, क्योंकि यहां बड़ी संख्या में लोग समुद्री कामकाज से जुड़े हैं। अंतरराष्ट्रीय रूटों पर चलने वाले मर्चेंट जहाजों के क्रू में भारतीय नागरिकों की बड़ी हिस्सेदारी है।


FSUI का तर्क है कि बार-बार होने वाली ये घटनाएं दिखाती हैं कि केवल नेविगेशनल सलाह और स्वैच्छिक सुरक्षा उपायों पर निर्भर रहने की सीमाएं हैं। यूनियन ने संघर्ष प्रभावित इलाकों से गुजरने वाले भारतीय नाविकों और कमर्शियल जहाजों की सुरक्षा के लिए नौसेना की पक्की मौजूदगी की मांग की है।


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