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भारतीय राजनीति में AI का प्रभाव: एक नई वास्तविकता का निर्माण

इस लेख में हम देखेंगे कि कैसे जनरेटिव AI भारतीय राजनीति में एक नया आयाम जोड़ रहा है। भाजपा के सोशल मीडिया प्रचार में हिंसक दृश्य और आक्रामकता का उपयोग किया जा रहा है, जो दर्शाता है कि AI ने राजनीतिक प्रचार को कैसे प्रभावित किया है। भारत में AI का उपयोग एक उपभोक्ता बाजार के रूप में हो रहा है, जबकि वास्तविकता यह है कि हम अपनी बुद्धि और ज्ञान को खोते जा रहे हैं। क्या भारत वास्तव में AI में एक महाशक्ति बन रहा है, या यह केवल एक भ्रम है? जानें इस लेख में।
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AI का उदय और राजनीतिक प्रचार

गुरुवार को मैंने भाजपा के सोशल मीडिया प्लेटफार्मों पर चल रहे प्रचार का विश्लेषण किया। भाजपा की एक वीडियो क्लिप में कांग्रेस के खिलाफ हिंसक प्रदर्शन दिखाए गए हैं। एक अन्य विज्ञापन में योद्धा तलवार लेकर आक्रामक मुद्रा में नजर आ रहे हैं। कहीं बंदूकें हैं, तो कहीं 'दिमागी नक्सलियों' पर हमले का आह्वान किया जा रहा है। यह सब कुछ क्रूर फिल्मों और वेब सीरीज की तरह की दृश्य-भाषा में प्रस्तुत किया गया है। स्पष्ट है कि जनरेटिव AI ने ऐसे वीडियो और प्रचार सामग्री का निर्माण करना बेहद आसान बना दिया है। पहले जिन कार्यों के लिए डिजाइनर और तकनीकी कौशल की आवश्यकता होती थी, अब केवल एक प्रभावी प्रॉम्प्ट से यह संभव हो गया है। असली और AI द्वारा निर्मित वीडियो के बीच का अंतर भी अब कठिन होता जा रहा है।


AI का राजनीतिक उपयोग और भारत की स्थिति

इसलिए, भारतीय राजनीति में AI एक शक्तिशाली उपकरण बन गया है, जो वास्तविकता जैसी दिखने वाली कृत्रिम वास्तविकता का निर्माण करता है। यह ध्यान देने योग्य है कि जबकि अमेरिका और चीन AI को और अधिक बुद्धिमान बनाने में जुटे हैं, भारत इसका उपभोक्ता बाजार बन गया है। यहां AI की उपयोगिता एक अलग स्तर पर है। इसका मतलब यह है कि AI भारत में पहले से मौजूद झूठ और अज्ञानता को और अधिक प्रभावी बना रहा है। सरकारी आंकड़े भले ही भारत को AI कौशल में अग्रणी बताते हों, लेकिन वास्तविकता यह है कि भारतीय कंपनियां कई क्षेत्रों में AI का उपयोग कर रही हैं, जबकि जनसंख्या में जो परिणाम उत्पन्न हो रहे हैं, वे मानसिक पतन और बर्बादी के संकेत हैं।


AI में भारत की स्थिति: एक गंभीर प्रश्न

इसलिए, भारत की स्थिति AI के क्षेत्र में वही है जो हाल ही में दिल्ली में आयोजित वैश्विक शिखर सम्मेलन में देखने को मिली थी। इस सम्मेलन में प्रधानमंत्री मोदी और विश्व के प्रमुख नेता शामिल थे। अरबों डॉलर के निवेश की घोषणाएं की गईं, जिससे यह धारणा बनी कि भारत AI की महाशक्ति बन गया है। लेकिन सच्चाई यह है कि एक महंगे निजी विश्वविद्यालय ने चीन में निर्मित Unitree Go2 रोबोटिक डॉग को अपने Centre of Excellence में रखा है, जिसका नाम 'Orion' रखा गया है। कुछ ही समय में यह स्पष्ट हो गया कि यह 'मेड इन चाइना' है। असली सवाल यह है कि हम AI का निर्माण कितना कर रहे हैं? उत्तर है, हम निर्माण नहीं कर रहे हैं, बल्कि अपनी बुद्धि और ज्ञान को झूठ में समाहित कर रहे हैं।