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मतदाता सूची में गड़बड़ी: निर्वाचन आयोग ने उठाए कड़े कदम, जानें क्या है नया नियम?

उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता सूची में गड़बड़ी के मामलों की जांच के बाद निर्वाचन आयोग ने सख्त कदम उठाए हैं। अब अधिकारियों की जवाबदेही पहले से अधिक कड़ी होगी। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों के खिलाफ केवल विभागीय कार्रवाई नहीं, बल्कि कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस मामले में बीएनएस की धारा 198 का उपयोग किया जाएगा, जिससे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ आपराधिक कार्रवाई की संभावना बढ़ गई है। जानें इस मामले में क्या हुआ और आगे क्या कदम उठाए जाएंगे।
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मतदाता सूची की विश्वसनीयता को बनाए रखने के लिए सख्त कदम


मतदाता सूची की विश्वसनीयता को सुनिश्चित करने के लिए अब अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही पहले से अधिक सख्त की जाएगी। उत्तर प्रदेश के पीलीभीत में मतदाता नामों में की गई कथित गड़बड़ियों की जांच के बाद निर्वाचन आयोग ने यह निर्णय लिया है। आयोग ने स्पष्ट किया है कि नियमों का उल्लंघन करने वालों को केवल विभागीय कार्रवाई तक सीमित राहत नहीं मिलेगी, बल्कि ऐसे मामलों में लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम और भारतीय न्याय संहिता की धारा 198 के तहत कानूनी कार्रवाई भी की जाएगी। इस प्रावधान के तहत दोषी पाए जाने पर एक वर्ष तक साधारण कारावास, आर्थिक दंड या दोनों सजाएं हो सकती हैं।


पीलीभीत में गड़बड़ी की जांच और कार्रवाई

पीलीभीत में दो मतदाता पंजीकरण अधिकारियों और एक डाटा एंट्री ऑपरेटर को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया गया है। जांच में यह सामने आया कि लगभग दस हजार मतदाताओं के नामों में बदलाव बिना आवश्यक आवेदन और दस्तावेजों के किया गया। निर्वाचन आयोग का यह निर्णय सरकारी कर्मचारियों के लिए एक कड़ी चेतावनी है जो चुनावी रिकॉर्ड में हेरफेर कर सकते हैं।


चुनाव आयोग की सख्त कार्रवाई

उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी द्वारा भेजी गई रिपोर्ट के आधार पर आयोग ने पीलीभीत मामले में कार्रवाई का निर्देश दिया। जांच में पाया गया कि डाटा एंट्री ऑपरेटर ने आवश्यक दस्तावेजों के बिना बड़ी संख्या में मतदाताओं के नाम सूची में जोड़ने और हटाने का कार्य किया। इस मामले में जिम्मेदार दो इलेक्टोरल रजिस्ट्रेशन ऑफिसरों की भूमिका भी जांच के दायरे में आई है।


कानूनी कार्रवाई का नया दिशा-निर्देश

निर्वाचन आयोग ने दोनों ईआरओ और संबंधित डाटा एंट्री ऑपरेटर को तुरंत निलंबित करने का आदेश दिया है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया है कि इन कर्मचारियों को पुनः सेवा में बहाल करने के लिए पूर्व स्वीकृति आवश्यक होगी। यह कार्रवाई दर्शाती है कि मतदाता सूची तैयार करने में लापरवाही को अब सामान्य प्रशासनिक चूक नहीं माना जाएगा।


बीएनएस की धारा 198 का उपयोग

पहली बार निर्वाचन आयोग ने बीएनएस की धारा 198 के तहत कानूनी कार्रवाई का निर्देश दिया है। अब तक, मतदाता सूची में गड़बड़ी से जुड़े मामलों में मुख्य रूप से लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम के तहत कार्रवाई होती रही है। लेकिन पीलीभीत मामले में आयोग ने आपराधिक कार्रवाई की संभावना को भी मजबूत किया है।


चुनाव आयोग का सख्त संदेश

पीलीभीत का मामला उस समय सामने आया है जब मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण को लेकर देशभर में चर्चा हो रही है। आयोग का यह नया कदम उन कर्मचारियों के लिए चेतावनी है, जिन्हें मतदाताओं के नाम दर्ज करने, हटाने और संशोधित करने का अधिकार दिया गया है। अब ऐसे मामलों में केवल निलंबन ही नहीं, बल्कि आपराधिक मुकदमे और संभावित सजाएं भी हो सकती हैं।