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मध्य पूर्व में बढ़ता तनाव: अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य टकराव

मध्य पूर्व में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को हिला कर रख दिया है। हाल ही में हुए ड्रोन हमलों के बाद दोनों देशों के बीच संघर्ष विराम टूट चुका है। अमेरिका ने जवाबी कार्रवाई करते हुए ईरान के सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं, जबकि ट्रंप ने ईरान को गंभीर चेतावनी दी है। ईरान ने भी जवाबी हमले की धमकी दी है, जिससे क्षेत्र में स्थिति और भी गंभीर हो गई है। जानें इस जटिल स्थिति के बारे में अधिक जानकारी।
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मध्य पूर्व में युद्ध की आशंका

मध्य पूर्व एक बार फिर गंभीर युद्ध के कगार पर पहुंच गया है। हाल ही में होर्मुज जलडम में पनामा के झंडे वाले तेल टैंकर एमटी कीकू और सिंगापुर के एक मालवाहक जहाज पर संदिग्ध ड्रोन हमलों के बाद अमेरिका और ईरान के बीच सैन्य तनाव बढ़ गया है। 18 जून को दोनों देशों के बीच हुआ संघर्ष विराम अब पूरी तरह से समाप्त हो चुका है। दोनों महाशक्तियां एक-दूसरे के खिलाफ विनाशकारी सैन्य कार्रवाई कर रही हैं। इस घटनाक्रम ने खाड़ी देशों में दहशत फैला दी है और वैश्विक अर्थव्यवस्था तथा कच्चे तेल की आपूर्ति पर भी नकारात्मक प्रभाव डाला है। तनाव की यह नई लहर तब शुरू हुई जब अंतरराष्ट्रीय वाणिज्यिक जहाजों को निशाना बनाया गया। अमेरिकी सेंट्रल कमांड के अनुसार, ईरान समर्थित बलों ने पनामा के तेल टैंकर पर ड्रोन हमला किया, जिसे अमेरिका ने अंतरराष्ट्रीय समुद्री नियमों का उल्लंघन बताया।


अमेरिका की प्रतिक्रिया

अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने तुरंत कार्रवाई करते हुए नौसेना और वायुसेना को जवाबी हमले के आदेश दिए। जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में अमेरिकी लड़ाकू विमानों और मिसाइलों ने हुरूम जलडम के संवेदनशील क्षेत्रों में बमबारी की। अमेरिकी सेना ने ईरान के सिरीक, बंदर लेंगे और केशम द्वीप पर स्थित कम से कम 10 प्रमुख सैन्य ठिकानों को निशाना बनाया। इन हमलों में इस्लामिक रिवोल्यूशनरी गार्ड कोर के ड्रोन अड्डों, रडार प्रणालियों और मिसाइल डिपो को नुकसान पहुंचाने का दावा किया गया है।


ट्रंप की चेतावनी

अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को एक गंभीर चेतावनी दी है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कहा कि यदि ईरान ने अपनी गतिविधियों को तुरंत नहीं रोका, तो अमेरिका ऐसी सैन्य कार्रवाई करेगा जो ईरान के अस्तित्व को समाप्त कर देगी। ट्रंप ने स्पष्ट किया कि अमेरिका अपने और अपने सहयोगियों के जहाजों की सुरक्षा के लिए किसी भी हद तक जाने को तैयार है। अमेरिकी हमलों और ट्रंप की धमकी के बाद, ईरान ने पीछे हटने से इंकार कर दिया है। ईरान के विदेश मंत्रालय ने अमेरिकी हवाई हमलों की निंदा की और इसे संयुक्त राष्ट्र चार्टर का उल्लंघन बताया।


ईरान की प्रतिक्रिया

ईरान के सर्वोच्च नेता के सैन्य सलाहकार मोहन रजाई ने अमेरिका को चेतावनी दी है कि उसने सीज फायर की शर्तों का उल्लंघन किया है। इसके बाद ईरान के Iआरजीसी ने कुवैत और बहरीन में स्थित अमेरिकी सैन्य ठिकानों और जहाजों पर मिसाइलें और आत्मघाती ड्रोन दागे। ईरान ने दावा किया है कि इस जवाबी हमले में अमेरिकी ठिकानों को भारी नुकसान हुआ है। ईरानी विदेश मंत्री अब्बास सराची ने कहा कि हुरमुस जलडमरू मध्य का प्रबंधन और सुरक्षा केवल ईरान के हाथों में रहेगा। ईरान ने यह भी कहा कि यदि अमेरिका ने हमले नहीं रोके, तो वह भविष्य की सभी शांति वार्ताओं को स्थगित कर देगा। इस सैन्य टकराव के बाद बहरीन, कुवैत और अन्य खाड़ी देशों में हाई अलर्ट घोषित कर दिया गया है।