मध्य प्रदेश में भाजपा का राज्यसभा चुनाव में खेल: कांग्रेस की चुनौती
राज्यसभा चुनाव में भाजपा की रणनीति
मध्य प्रदेश में भाजपा ने राज्यसभा चुनाव को जटिल बना दिया है, जो कि कोई नई बात नहीं है। भाजपा लंबे समय से इस प्रकार की गतिविधियों में संलग्न है। यह जानबूझकर राज्यसभा चुनाव में खरीद-फरोख्त को बढ़ावा देती है, जिससे राजनीतिक भ्रष्टाचार को एक संस्थागत रूप दिया गया है। मध्य प्रदेश का राज्यसभा चुनाव इस बात का एक उदाहरण है।
राज्यसभा की तीन सीटें खाली हैं, और एक सीट जीतने के लिए 58 वोटों की आवश्यकता है। कांग्रेस के पास वर्तमान में 62 विधायकों का समर्थन है, जिसमें से एक सीट दिग्विजय सिंह की है, जो रिटायर हो रहे हैं। कांग्रेस ने मीनाक्षी नटराजन को उनकी जगह उम्मीदवार बनाया है।
इस सीट पर कोई मुकाबला नहीं होना चाहिए था, क्योंकि कांग्रेस के पास जीतने के लिए आवश्यक वोटों से चार अधिक हैं। दूसरी ओर, भाजपा को दो सीटें जीतने के बाद 48 वोट मिलते हैं, जिससे उसे कम से कम 10 अतिरिक्त वोटों की आवश्यकता है। मध्य प्रदेश में कोई क्षेत्रीय पार्टी या निर्दलीय विधायक नहीं हैं, जिसका अर्थ है कि भाजपा को 10 विधायकों को कांग्रेस से तोड़ना होगा।
हालांकि, ईमानदारी और शुचिता की राजनीति का दावा करने वाली भाजपा अब कांग्रेस के 10 विधायकों को तोड़ने की योजना बना रही है। यह चुनाव कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष जीतू पटवारी के लिए एक बड़ी परीक्षा साबित हो सकता है। यदि वे विधायकों को एकजुट रखने में सफल होते हैं और मीनाक्षी नटराजन को जीत दिलाते हैं, तो उनका कद आलाकमान की नजर में बढ़ जाएगा। इससे वे 2028 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस की ओर से मुख्यमंत्री पद के चेहरे के रूप में उभर सकते हैं।
