मध्यावधि चुनावों के बाद ट्रंप की ईरान नीति पर विचार
डेमोक्रेट्स का नियंत्रण और ट्रंप की रणनीति
डेमोक्रेट्स के अमेरिकी हाउस और सीनेट पर नियंत्रण के बाद, मध्यावधि चुनावों ने रिपब्लिकन पार्टी को एक बड़ा झटका दिया है। इसके बावजूद, राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप मध्य पूर्व में स्थिति को सामान्य करने की कोशिश करते नहीं दिख रहे हैं। उन्होंने हाल ही में अपनी राष्ट्रीय सुरक्षा टीम के साथ महत्वपूर्ण बैठकें कीं, जिनमें ईरान पर संभावित हमलों की चर्चा की गई। रिपोर्ट के अनुसार, ये बैठकें बुधवार और गुरुवार को व्हाइट हाउस में आयोजित की गईं। अधिकारियों ने ट्रंप को 9 नवंबर की तारीख के बारे में बताया, जब मध्य पूर्व में 'नया चाँद' (अमावस्या) होगा, जिससे चाँदनी की कमी होगी। इस स्थिति को सैन्य अभियानों के लिए अनुकूल माना जा रहा है, जिससे हमलों की पुनरारंभ की संभावना बढ़ गई है.
जल्द ही निर्णय लेने की तैयारी
80 वर्षीय रिपब्लिकन नेता ने गुरुवार को कहा कि वे जल्द ही यह तय करेंगे कि अमेरिका को हमले फिर से शुरू करने चाहिए या नहीं। इज़राइल लगातार अमेरिका से हमले फिर से शुरू करने का आग्रह कर रहा है, जिससे दोनों देशों के बीच मतभेद उत्पन्न हो रहे हैं। कई रिपब्लिकन नेताओं ने अपनी मध्यावधि चुनावों में हार के लिए इस संघर्ष को जिम्मेदार ठहराया है। ट्रंप ने ओवल ऑफिस में पत्रकारों से कहा कि वे देश को बर्बाद नहीं करना चाहते, लेकिन ऐसा करना पड़ सकता है। उन्होंने कहा कि जल्द ही यह स्पष्ट हो जाएगा कि वे आगे क्या कदम उठाने वाले हैं।
ईरान का अमेरिका को प्रस्ताव
खबरों के अनुसार, ईरान ने कतर के माध्यम से अमेरिका को अपने परमाणु कार्यक्रम के संबंध में एक प्रस्ताव भेजा है। एक हफ्ते पहले की रिपोर्ट में कहा गया था कि यदि अमेरिका हमले रोकता है और प्रतिबंध हटाता है, तो ईरान अपने अत्यधिक संवर्धित यूरेनियम के भंडार को किसी तीसरे देश में भेज सकता है और सात दिनों के भीतर 'स्ट्रेट ऑफ होर्मुज' को फिर से खोल सकता है। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं है कि इस प्रस्ताव पर सहमति बनी है या नहीं। अमेरिका का हमेशा से यही कहना रहा है कि ईरान को अपनी परमाणु महत्वाकांक्षाओं को छोड़ देना चाहिए, लेकिन तेहरान का कहना है कि जब तक वाशिंगटन उनकी मांगें नहीं मानता, तब तक कोई बातचीत नहीं हो सकती।
