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ममता बनर्जी की पार्टी के बैंक खातों पर रोक, सुप्रीम कोर्ट ने दी राहत से किया इनकार

तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी की पार्टी में हाल ही में विभाजन हुआ है, जिसके चलते उनके बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है। ममता ने सुप्रीम कोर्ट में राहत की मांग की, लेकिन उन्हें कोई सफलता नहीं मिली। कोर्ट ने कहा कि चुनाव आयोग ने पार्टी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है और इस मामले में कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। जानें इस राजनीतिक विवाद के पीछे की पूरी कहानी और इसके संभावित प्रभाव।
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सुप्रीम कोर्ट का फैसला


नई दिल्ली। तृणमूल कांग्रेस की संस्थापक ममता बनर्जी की पार्टी में विभाजन हो गया है, जिसके चलते टूटे हुए गुट द्वारा दायर याचिका पर ममता बनर्जी की पार्टी के बैंक खातों पर रोक लगा दी गई है। ममता ने इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था, लेकिन उन्हें वहां से कोई राहत नहीं मिली। सर्वोच्च न्यायालय ने गुरुवार को तृणमूल कांग्रेस को उन चार बैंक खातों को संचालित करने की अनुमति देने से मना कर दिया, जिन्हें पश्चिम बंगाल पुलिस ने साइबर अपराध की शिकायत के चलते फ्रीज कर दिया था।


कोर्ट की सुनवाई

सुनवाई के दौरान जस्टिस एमएम सुंदरेश और जस्टिस पीबी वराले की बेंच ने कहा, 'चुनाव आयोग ने टीएमसी का चुनाव चिन्ह फ्रीज कर दिया है। खातों में मौजूद फंड का असली हकदार कौन है, इस पर कलकत्ता हाई कोर्ट में सुनवाई चल रही है। इसलिए हम इस मामले की सुनवाई नहीं करेंगे।' उल्लेखनीय है कि चार मई को पश्चिम बंगाल चुनाव के परिणाम आए थे, जिसमें टीएमसी 15 साल बाद सत्ता से बाहर हो गई थी।


पार्टी के भीतर का विवाद

इसके बाद पार्टी के 58 विधायकों ने ऋतब्रत बनर्जी के नेतृत्व में एक अलग गुट बना लिया, जो खुद को असली तृणमूल कांग्रेस बताता है। ममता बनर्जी की पार्टी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक सिंघवी ने कहा कि बैंक खातों को फ्रीज करना पार्टी की राजनीतिक गतिविधियों को बाधित करने का प्रयास है। उन्होंने बताया कि उपचुनावों के मद्देनजर पार्टी को हर महीने कम से कम 12.15 करोड़ रुपए की आवश्यकता है।


राज्य सरकार का विरोध

राज्य सरकार की ओर से सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने याचिका का विरोध करते हुए कहा कि दोनों गुट खुद को असली तृणमूल बता रहे हैं और सुप्रीम कोर्ट ने चुनाव आयोग को यह तय करने का निर्देश दिया है कि असली पार्टी कौन सी है। उन्होंने कहा, 'दूसरा गुट भी कह रहा है कि हमें खाता चलाने की अनुमति दी जाए। इसलिए उन्हें असली तृणमूल पर फैसले का इंतजार करना चाहिए।'