ममता बनर्जी ने टीएमसी के सभी संगठनों को किया भंग, पार्टी में उठे विवाद
टीएमसी का संगठनात्मक पुनर्गठन
पश्चिम बंगाल में 15 वर्षों तक शासन करने वाली तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) अब संकट में है। पार्टी प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने एक महत्वपूर्ण निर्णय लिया है, जिसके तहत पार्टी की सभी समितियों और फ्रंटल संगठनों को तुरंत भंग किया जाएगा।
इस कदम का कारण यह है कि निष्कासित विधायक ऋतब्रत बनर्जी ने हाल ही में विधानसभा में प्रवेश किया, उनके साथ 59 विधायकों के समर्थन पत्र भी थे। उन्होंने यह दावा किया कि उनका गुट राज्य में मुख्य विपक्षी दल है, जबकि ममता बनर्जी और उनके भतीजे अभिषेक बनर्जी के समर्थक अब अल्पमत में हैं।
टीएमसी ने सोशल मीडिया पर इस निर्णय की पुष्टि करते हुए कहा कि यह कदम सावधानीपूर्वक विचार के बाद उठाया गया है। पार्टी सभी स्तरों पर आत्मनिरीक्षण और संगठनात्मक मूल्यांकन करेगी।
इस प्रक्रिया के परिणामों के आधार पर, पार्टी की संरचना को पुनर्गठित किया जाएगा और उचित समय पर इसकी घोषणा की जाएगी। टीएमसी अपने संगठन को मजबूत करने और भविष्य की चुनौतियों का सामना करने के लिए प्रतिबद्ध है।
हाल ही में, जब ममता बनर्जी ने विधायकों की बैठक बुलाई, तो 60 विधायकों ने इसमें भाग नहीं लिया, जिससे पार्टी के टूटने की अटकलें तेज हो गईं। इसी बीच, ऋतब्रत बनर्जी और संदीपन साहा को पार्टी से निलंबित कर दिया गया था।
ऋतब्रत ने निलंबन के बाद अभिषेक बनर्जी की सुरक्षा की मांग पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि वह किस प्रकार के जननेता हैं, जो अपनी हार के बाद 26 दिनों तक घर से बाहर नहीं निकले। अब वह केंद्रीय बलों की सुरक्षा की मांग कर रहे हैं।
ऋतब्रत ने अभिषेक पर आरोप लगाया कि वह पार्टी को कॉर्पोरेट शैली में चला रहे हैं और टीएमसी पूरी तरह से इंडियन पॉलिटिकल एक्शन कमेटी (आई-पैक) पर निर्भर है।
