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महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदर्शन: कांग्रेस की अनुपस्थिति पर सवाल

महात्मा गांधी की जयंती पर देशभर में हुए प्रदर्शनों में कांग्रेस की अनुपस्थिति ने सवाल उठाए हैं। दिल्ली और मुंबई में हुए आंदोलनों में विभिन्न राजनीतिक दलों की भागीदारी रही, लेकिन कांग्रेस ने इस दिन कोई ठोस योजना नहीं बनाई। जानें किसने प्रदर्शन किया और किसने क्रेडिट लिया।
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महात्मा गांधी की जयंती पर प्रदर्शन


दो अक्टूबर को महात्मा गांधी की जयंती के अवसर पर देशभर में कई प्रदर्शन और आंदोलन हुए। दिल्ली से लेकर मुंबई तक हजारों लोग सड़कों पर उतरे, तिरंगा हाथ में लेकर और गांधी की तस्वीर वाली टीशर्ट पहनकर। हालांकि, गांधी की विरासत का दावा करने वाली कांग्रेस इस दिन कहीं नजर नहीं आई। कांग्रेस ने अपनी कार्य समिति की बैठक में यह तय किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ प्रदर्शन किया जाएगा, जो आठ अक्टूबर तक चलेगा। लेकिन दो अक्टूबर के लिए कोई ठोस योजना नहीं बनाई गई।


कांग्रेस ने यह भी तय किया कि छह अक्टूबर को दिल्ली में निर्वाचन सदन का घेराव किया जाएगा। संभव है कि इस दिन भी भीड़ जुटे और कांग्रेस तथा अन्य विपक्षी दल अपने संसाधनों से आंदोलन को सफल बनाने का प्रयास करें। लेकिन दो अक्टूबर का प्रदर्शन अधिक व्यवस्थित और स्वंय-स्फूर्त नजर आया। कांग्रेस की सहयोगी पार्टियों ने इस आंदोलन को सफल बनाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।


दिल्ली में आम आदमी पार्टी के नेता सक्रिय रहे, लेकिन आंदोलन का मूल स्वरूप लेफ्ट का था। सीपीआई, सीपीएम और सीपीआई माले के छात्र संगठनों ने इस आंदोलन की योजना बनाई थी। एक अक्टूबर को जंतर मंतर पर नेहा बोरा ने वीडियो बनाकर सोशल मीडिया पर साझा किया। इसके बाद लेफ्ट के छात्र संघों ने लोगों को जुटाने का काम किया। हालांकि, आम आदमी पार्टी के कुछ नेता भी जंतर मंतर पहुंचे और क्रेडिट लेने का प्रयास किया।


मुंबई में कॉकरोच जनता पार्टी (सीजेपी) ने आंदोलन का ऐलान किया, जिसमें उद्धव ठाकरे की पार्टी भी शामिल हो गई। शिवाजी पार्क में सीजेपी ने उद्धव की पार्टी की मदद से अच्छी भीड़ जुटाई। दिल्ली में सुबह आंदोलन शुरू हुआ और शाम चार बजे से मुंबई में सीजेपी ने प्रदर्शन किया। आदित्य ठाकरे कुछ फिल्मी कलाकारों के साथ पहुंचे और बाद में उद्धव ठाकरे भी आए। ध्यान देने वाली बात यह है कि उद्धव ठाकरे ने कांग्रेस को सलाह दी थी कि वह अकेले चलने का रवैया छोड़े, लेकिन दो अक्टूबर को खुद ही कांग्रेस से अलग सीजेपी के आंदोलन में शामिल हो गए।