महाराष्ट्र की राजनीति में नया मोड़: छह सांसदों ने शिंदे गुट का किया समर्थन
राजनीतिक हलचल का नया अध्याय
मुंबई: महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से बड़े बदलाव की संभावनाएं बढ़ गई हैं। शिवसेना (एकनाथ शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य चंद्रकांत रघुवंशी ने गुरुवार को यह जानकारी दी कि शिवसेना (उद्धव बालासाहेब ठाकरे) के छह लोकसभा सांसदों ने एकनाथ शिंदे के नेतृत्व पर भरोसा जताते हुए उनके गुट में शामिल होने का निर्णय लिया है।
रघुवंशी ने कहा, “महाराष्ट्र में ‘ऑपरेशन टाइगर’ सफल रहा है। छह सांसदों ने एकनाथ शिंदे पर विश्वास दिखाया है और अब वे शिवसेना में शामिल हो गए हैं। हम उनका स्वागत करते हैं।” उन्होंने यह भी कहा कि जो नेता जनता के कल्याण के लिए काम करना चाहते हैं, उन्हें शिवसेना-भाजपा गठबंधन का हिस्सा बनना चाहिए। सूत्रों के अनुसार, शिवसेना (यूबीटी) के नौ लोकसभा सांसदों में से सात सांसद शिंदे गुट के संपर्क में हैं और पाला बदलने पर विचार कर रहे हैं। यदि ऐसा हुआ, तो महाराष्ट्र में 2022 जैसा राजनीतिक संकट उत्पन्न हो सकता है, जब शिवसेना दो धड़ों में विभाजित हो गई थी।
इस बीच, केंद्रीय मंत्री प्रतापराव जाधव ने शिवसेना (यूबीटी) के नेता संजय राउत पर भी निशाना साधा। उन्होंने कहा कि राउत की भाषा उद्धव ठाकरे गुट को नुकसान पहुंचा रही है और उनके राजनीतिक आधार को कमजोर कर रही है। ‘ऑपरेशन टाइगर’ और सांसदों द्वारा दिए गए पत्र को लेकर चल रही चर्चाओं पर जाधव ने कहा कि यह मामला अब लोकसभा अध्यक्ष के पास है। उन्होंने स्पष्ट किया कि सांसदों द्वारा दिया गया पत्र शिवसेना (यूबीटी) का आंतरिक मामला है और इस पर अंतिम निर्णय लोकसभा अध्यक्ष ही लेंगे।
शिवसेना के स्थापना दिवस (19 जून) से पहले, जाधव ने उद्धव गुट पर परोक्ष हमला करते हुए कहा कि बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा में विश्वास रखने वाले कार्यकर्ता और समर्थक इस अवसर पर एकजुट होकर स्थापना दिवस मनाएंगे। उनके इस बयान को शिंदे गुट को ‘असली शिवसेना’ बताने की कोशिश के रूप में देखा जा रहा है। महाराष्ट्र की राजनीति में बढ़ती हलचल के बीच अब सभी की निगाहें लोकसभा अध्यक्ष के निर्णय और शिवसेना के स्थापना दिवस पर होने वाले शक्ति प्रदर्शन पर टिकी हुई हैं।
