Newzfatafatlogo

महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की अटकलें

महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर से हलचल मच गई है, जब शिवसेना (यूबीटी) के सांसदों की दिल्ली यात्रा की खबरें आईं। सूत्रों के अनुसार, 6 सांसदों ने दिल्ली पहुंचकर लोकसभा अध्यक्ष से मुलाकात करने की योजना बनाई है। इस बीच, संजय राउत ने सांसदों पर खरीद-फरोख्त के आरोप लगाए हैं। उद्धव ठाकरे ने कहा है कि जो भी पार्टी छोड़ना चाहता है, उसे जाने दिया जाए। राजनीतिक गलियारों में इस घटनाक्रम पर सभी की नजरें टिकी हुई हैं।
 | 
महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना (यूबीटी) में संभावित टूट की अटकलें

शिवसेना में टूट की संभावना

नई दिल्ली। महाराष्ट्र की राजनीतिक स्थिति में एक बार फिर से महत्वपूर्ण बदलाव की संभावना जताई जा रही है। ममता बनर्जी की तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के बाद अब उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) में भी बड़े बदलाव की अटकलें तेज हो गई हैं। सूत्रों के अनुसार, पार्टी के 9 लोकसभा सांसदों में से 6 सांसद मंगलवार रात चार्टर्ड विमान से दिल्ली पहुंचे हैं और वे आज लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर सकते हैं।


जानकारी के अनुसार, महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एवं शिवसेना प्रमुख एकनाथ शिंदे भी दिल्ली पहुंच चुके हैं। इन सांसदों की बैठक शिंदे के पुत्र एवं सांसद श्रीकांत शिंदे के निवास पर होने की संभावना है, जिसके बाद एक प्रेस कॉन्फ्रेंस भी आयोजित की जा सकती है। शिवसेना (शिंदे गुट) के विधान परिषद सदस्य कृपाल तुमाने ने कहा है कि पिछले एक महीने से इन सांसदों के साथ बातचीत चल रही थी और अब यह प्रक्रिया अंतिम चरण में पहुंच गई है।


वहीं, शिवसेना (यूबीटी) के वरिष्ठ नेता संजय राउत ने सोशल मीडिया पर गंभीर आरोप लगाए हैं। उन्होंने कहा कि सांसदों को पार्टी बदलने के लिए 15-15 करोड़ रुपये अग्रिम राशि के रूप में दिए जा रहे हैं। राउत ने अपनी पोस्ट में लिखा, “महाराष्ट्र के सांसदों को आज रात पार्टी बदलने के लिए 15 करोड़ रुपये एडवांस के तौर पर दिए जा रहे हैं। यह शर्मनाक है।”


हालांकि, इससे पहले संजय राउत ने सांसदों के दल-बदल की खबरों को निराधार बताया था। शिवसेना (यूबीटी) प्रमुख उद्धव ठाकरे ने हाल ही में कहा था कि जो भी पार्टी छोड़ना चाहता है, वह अपनी इच्छा से जा सकता है। उन्होंने कहा, “मैं किसी पर दबाव नहीं बनाना चाहता। अगर कोई जाना चाहता है तो उसे जाने दीजिए। जो लोग बाला साहेब ठाकरे की शिवसेना छोड़कर गए हैं, उन्हें भविष्य में पछताना पड़ेगा।”


राजनीतिक गलियारों में अब सभी की नजरें दिल्ली में होने वाली संभावित बैठकों और उसके बाद आने वाले घटनाक्रम पर टिकी हुई हैं।