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महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की कर्ज माफी की घोषणा की

महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की कर्ज माफी की घोषणा की है, जिससे 56 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ होगा। कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इस पहल को कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया। इसके साथ ही, राज्य सरकार 'महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक' पेश करने की योजना बना रही है। इस लेख में जानें कि कैसे ये कदम किसानों के जीवन को प्रभावित करेंगे और सरकार की अन्य योजनाओं के बारे में।
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महाराष्ट्र सरकार ने किसानों के लिए 36,585 करोड़ रुपये की कर्ज माफी की घोषणा की

किसानों को मिली बड़ी राहत


महाराष्ट्र सरकार ने किसानों को राहत प्रदान करते हुए 36,585 करोड़ रुपये की कृषि कर्ज माफी की घोषणा की है। इस निर्णय से राज्य के 56 लाख से अधिक किसानों को सीधा लाभ मिलने की उम्मीद है।


राज्य विधानमंडल के मानसून सत्र के तीसरे दिन कृषि मंत्री दत्तात्रय भरणे ने इस पहल की जानकारी दी। उन्होंने कहा कि यह कदम कृषि क्षेत्र को सशक्त बनाने की सरकार की प्रतिबद्धता का एक हिस्सा है। विधानसभा में नियम 293 के तहत हुई चर्चा का जवाब देते हुए भरणे ने कहा, "महायुति सरकार किसानों के साथ मजबूती से खड़ी है। मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्रियों के आश्वासनों के अनुसार, हम एक व्यापक कर्जमाफी लागू कर रहे हैं। यह योजना 2009, 2017 और 2019 के पिछले प्रयासों की तुलना में कहीं अधिक व्यापक है।"


मंत्री ने बताया कि राज्य सरकार इसी सत्र में 'महाराष्ट्र महिला किसान सशक्तीकरण विधेयक' पेश करेगी, जिसका उद्देश्य खेतों में काम करने वाली महिलाओं को कानूनी मान्यता और समान अधिकार प्रदान करना है। यह कदम संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2026 को 'अंतरराष्ट्रीय महिला किसान वर्ष' घोषित करने के संदर्भ में भी महत्वपूर्ण है।


किसान दुर्घटना बीमा योजना में बदलाव करते हुए भरणे ने कहा कि अब खेतिहर मजदूरों को भी सुरक्षा दी जाएगी। इसके अलावा, लू के प्रकोप के कारण होने वाली मौतों को भी इस योजना के तहत वित्तीय राहत के लिए योग्य माना जाएगा। मंत्री ने खरीफ सीजन के लिए आश्वस्त किया कि खेती के लिए आवश्यक चीजों की कोई कमी नहीं है। राज्य में 42 लाख टन रासायनिक उर्वरक और 28 लाख टन बीज पहले ही उपलब्ध कराए जा चुके हैं।


उन्होंने 'लिंकिंग' बिक्री की गैर-कानूनी प्रथा के खिलाफ सख्त चेतावनी दी, जिसमें डीलर किसानों को अनुदानित खाद के साथ गैर-अनुदानित उत्पाद खरीदने के लिए मजबूर करते हैं। मंत्री ने किसानों के लिए एक टोल-फ्री नंबर (1800-233-4000) भी जारी किया। कृषि मंत्री ने फसल बीमा में 'बीड़ पैटर्न' (80-110 मॉडल) की सफलता का उल्लेख किया, जिसके तहत 96 प्रतिशत योग्य किसानों को पहले ही 1,523 करोड़ रुपये का मुआवजा मिल चुका है।


मंत्री ने किसानों से अपील की कि मानसून की शुरुआत के बावजूद जब तक मिट्टी में पर्याप्त नमी न हो जाए, तब तक बुवाई में जल्दबाजी न करें। भावुक होते हुए भरणे ने कहा, "मैं खुद एक किसान हूं और जब तक मैं अपने खेतों में न चला जाऊं, मुझे नींद नहीं आती। यह सरकार किसानों की है और हमारा लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि संकट के समय उन्हें अपने हाल पर न छोड़ दिया जाए।"